UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BD) with Answer Key and Solutions PDF is Available to Download

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Shivam Yadav

Updated on - Nov 25, 2025

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 PDF (Code 801 BD) with Answer Key and Solutions PDF is available for download here. UP Board Class 10 exams were conducted between February 24th to March 12th 2025. The total marks for the theory paper were 70. Students reported the paper to be easy to moderate.

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BD) with Solutions

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UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BD) with Solutions

Question 1:

शुक्रयुगीन लेखक हैं :

  • (A) नामदास
  • (B) शिवपूजन सहाय
  • (C) रामप्रसाद मिश्र
  • (D) दौलत राम
Correct Answer: (B) शिवपूजन सहाय
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Step 1: Understanding 'शुक्रयुगीन लेखक'

शुक्रयुगीन लेखक वह होते हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं में समाज के प्रति विचार और भूतकाल की परंपराओं को समझने की कोशिश की हो। शिवपूजन सहाय इस श्रेणी में आते हैं और उनकी रचनाएँ समाज की सच्चाइयों को उजागर करती हैं।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "नामदास" → नामदास को शुक्रयुगीन लेखक के रूप में नहीं जाना जाता है।

- (B) "शिवपूजन सहाय" → शिवपूजन सहाय सही उत्तर हैं। वे एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हैं, जिनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

- (C) "रामप्रसाद मिश्र" → रामप्रसाद मिश्र भी हिंदी साहित्यकार थे, लेकिन वे शुक्रयुगीन लेखक के रूप में प्रसिद्ध नहीं हैं।

- (D) "दौलत राम" → दौलत राम भी एक हिंदी साहित्यकार थे, लेकिन वे शुक्रयुगीन लेखक नहीं हैं।


Step 3: Conclusion

शिवपूजन सहाय शुक्रयुगीन लेखक के रूप में प्रसिद्ध हैं, hence option (B) is correct.


So, the correct option is (B) शिवपूजन सहाय। Quick Tip: शुक्रयुगीन लेखकों ने साहित्य में समाज के मुद्दों और मानवीय भावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।


Question 2:

मोहन राकेश का नाटक है :

  • (A) अजातशत्रु
  • (B) सिंदूर की होली
  • (C) स्वर्ग की झलक
  • (D) आधे-अधूरे
Correct Answer: (D) आधे-अधूरे
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Step 1: Understanding 'मोहन राकेश के नाटक'

मोहन राकेश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार रहे हैं। उनका नाटक 'आधे-अधूरे' एक प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण नाटक है, जो भारतीय समाज की सच्चाइयों को उजागर करता है।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "अजातशत्रु" → यह नाटक मोहन राकेश का नहीं है, यह किसी अन्य लेखक का हो सकता है।

- (B) "सिंदूर की होली" → यह नाटक भी मोहन राकेश का नहीं है।

- (C) "स्वर्ग की झलक" → यह नाटक भी मोहन राकेश का नहीं है।

- (D) "आधे-अधूरे" → यह सही उत्तर है, क्योंकि 'आधे-अधूरे' मोहन राकेश का प्रसिद्ध नाटक है।


Step 3: Conclusion

'आधे-अधूरे' मोहन राकेश का प्रसिद्ध नाटक है, hence option (D) is correct.


So, the correct option is (D) आधे-अधूरे। Quick Tip: मोहन राकेश के नाटक समाज और परिवार के जटिल रिश्तों को अच्छे से दर्शाते हैं।


Question 3:

'साहित्य की विशेषताएँ' लेख की विधा है:

  • (A) आलोचना
  • (B) उपन्यास
  • (C) निबंध
  • (D) नाटक
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: 'निबंध' एक ऐसी विधा है जिसमें किसी विशेष विषय पर विचार और विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है। साहित्य की विशेषताओं पर लिखे गए लेख को निबंध कहा जाता है।


Question 4:

'महके आँगन-चहके द्वार' के स्वचित्रिता हैं:

  • (A) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
  • (B) महादेवी वर्मा
  • (C) रामवृक्ष 'बीनीपुरी'
  • (D) प्रभाकर माचवे
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: महादेवी वर्मा को हिंदी साहित्य में स्वचित्रिता और आत्मकथात्मक लेखन के लिए जाना जाता है। 'महके आँगन-चहके द्वार' उनकी स्वचित्रिता की उत्कृष्ट कृति है।


Question 5:

'उसने कहा था' प्रसिद्ध कहानी के कहानीकार हैं :

  • (A) राजा शिव प्रसाद 'सित्तो हिंद'
  • (B) इन्शा अल्लाह ख़ाँ
  • (C) चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (C) चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'
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Step 1: Understanding 'उसने कहा था'

'उसने कहा था' चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की प्रसिद्ध कहानी है, जिसे हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह कहानी एक पुरुष और महिला के मानसिक संघर्ष और भावनाओं को प्रस्तुत करती है।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "राजा शिव प्रसाद 'सित्तो हिंद'" → यह लेखक 'उसने कहा था' के रचनाकार नहीं हैं।

- (B) "इन्शा अल्लाह ख़ाँ" → यह लेखक भी 'उसने कहा था' के लेखक नहीं हैं।

- (C) "चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'" → यह सही उत्तर है। चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' ने 'उसने कहा था' कहानी लिखी थी।

- (D) "इनमें से कोई नहीं" → यह गलत है, क्योंकि (C) सही उत्तर है।


Step 3: Conclusion

'उसने कहा था' कहानी के लेखक चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' हैं, hence option (C) is correct.


So, the correct option is (C) चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'। Quick Tip: प्रसिद्ध हिंदी कहानीकारों को पहचानने के लिए उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं को जानना महत्वपूर्ण है।


Question 6:

रीतिकाव्यधारा के कवि हैं :

  • (A) केशवदास
  • (B) धनानंद
  • (C) ठाकुर
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (A) केशवदास
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Step 1: Understanding रीतिकाव्यधारा

रीतिकाव्यधारा वह साहित्यिक धारा है जिसमें काव्य रचनाओं में शृंगारी और सौंदर्यवादी भावनाएँ प्रमुख होती हैं। केशवदास इस धारा के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "केशवदास" → यह सही उत्तर है। केशवदास रीतिकाव्यधारा के प्रमुख कवि थे और उन्होंने 'रामचन्द्रिका' और 'सूरसागर' जैसी रचनाएँ की।

- (B) "धनानंद" → धनानंद रीतिकाव्यधारा के कवि नहीं थे।

- (C) "ठाकुर" → ठाकुर भी रीतिकाव्यधारा के कवि नहीं थे।

- (D) "इनमें से कोई नहीं" → यह गलत है, क्योंकि (A) सही उत्तर है।


Step 3: Conclusion

केशवदास रीतिकाव्यधारा के प्रमुख कवि थे, hence option (A) is correct.


So, the correct option is (A) केशवदास। Quick Tip: रीतिकाव्यधारा के कवियों ने काव्य में शृंगार, सौंदर्य और प्रेम के भावों को प्रमुखता से व्यक्त किया।


Question 7:

प्रयोगवाद युगीन कृति है:

  • (A) कामायनी
  • (B) प्रिय प्रवास
  • (C) रंग में भंग
  • (D) धूप के धान
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: 'कामायनी' रचनात्मक प्रयोगवाद का प्रमुख उदाहरण है। इसका अध्ययन प्रयोगवाद काव्यधारा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


Question 8:

सुमित्रानंदन पंत की रचना है:

  • (A) 'हिमतरंगीनी'
  • (B) 'चिदम्बर'
  • (C) 'यशोधरा'
  • (D) 'त्रिधारा'
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: सुमित्रानंदन पंत की प्रमुख रचनाओं में 'हिमतरंगीनी' का विशेष स्थान है, जो उनकी काव्यकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।


Question 9:

'तीसरा सतक' का प्रकाशन वर्ष है :

  • (A) 1979
  • (B) 1959
  • (C) 1951
  • (D) 1971
Correct Answer: (B) 1959
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Step 1: Understanding 'तीसरा सतक'

'तीसरा सतक' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सूरदास की महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है। इस रचनात्मक ग्रंथ का प्रकाशन 1959 में हुआ था।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "1979" → यह गलत है, क्योंकि 'तीसरा सतक' का प्रकाशन वर्ष 1959 है।

- (B) "1959" → यह सही उत्तर है, क्योंकि 'तीसरा सतक' का प्रकाशन वर्ष 1959 में हुआ था।

- (C) "1951" → यह गलत है, क्योंकि 'तीसरा सतक' 1959 में प्रकाशित हुआ था।

- (D) "1971" → यह भी गलत है।


Step 3: Conclusion

'तीसरा सतक' का प्रकाशन वर्ष 1959 है, hence option (B) is correct.


So, the correct option is (B) 1959। Quick Tip: महत्वपूर्ण काव्य रचनाओं के प्रकाशन वर्ष को याद रखना हिंदी साहित्य के अध्ययन में सहायक होता है।


Question 10:

'गंगा लहरी' की विशेषता है :

  • (A) भूषण
  • (B) मीतिराम
  • (C) पद्माकर
  • (D) देव
Correct Answer: (C) पद्माकर
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Step 1: Understanding 'गंगा लहरी'

'गंगा लहरी' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि पद्माकर की रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने गंगा नदी की महिमा और महत्व को अपने काव्य में प्रस्तुत किया है।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "भूषण" → भूषण एक प्रसिद्ध कवि थे, लेकिन वे 'गंगा लहरी' के रचनाकार नहीं हैं।

- (B) "मीति राम" → मीति राम का कोई विशेष संबंध 'गंगा लहरी' से नहीं है।

- (C) "पद्माकर" → यह सही उत्तर है। 'गंगा लहरी' पद्माकर की रचना है।

- (D) "देव" → यह गलत है। 'गंगा लहरी' का रचनाकार पद्माकर था, देव नहीं।


Step 3: Conclusion

'गंगा लहरी' का रचनाकार पद्माकर था, hence option (C) is correct.


So, the correct option is (C) पद्माकर। Quick Tip: हिंदी साहित्य में प्रमुख काव्य रचनाओं के रचनाकारों और उनके योगदान को याद करना महत्वपूर्ण है।


Question 11:

हास्य रस का स्थायिभाव है:

  • (A) विप्रय
  • (B) उत्साह
  • (C) हास
  • (D) जुगुप्सा
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: हास्य रस के स्थायिभाव के रूप में 'हास' ही उपयुक्त होता है। यह मानव भावनाओं और स्थिति का मजाकिया रूप होता है।


Question 12:

'दर्पण-कमल बंदों ही रत्न' में अलंकार है:

  • (A) रूपक
  • (B) उत्तेक्षा
  • (C) उपमा
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: रूपक अलंकार में किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप में किसी अन्य वस्तु की विशेषता का अनुप्रयोग किया जाता है, जैसे 'दर्पण-कमल' का उदाहरण।


Question 13:

'सोत्र' छंद के तीसरे चरण में मात्रा होती हैं :

  • (A) 11
  • (B) 13
  • (C) 16
  • (D) 24
Correct Answer: (B) 13
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Step 1: Understanding 'सोत्र' छंद

सोत्र छंद में प्रत्येक चरण में विशेष रूप से मात्रा का निर्धारण होता है, जिसमें तीसरे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "11" → यह गलत है, क्योंकि तीसरे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं।

- (B) "13" → यह सही उत्तर है। सोत्र छंद के तीसरे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं।

- (C) "16" → यह भी गलत है, क्योंकि तीसरे चरण में 13 मात्राएँ हैं।

- (D) "24" → यह गलत है।


Step 3: Conclusion

सोत्र छंद के तीसरे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं, hence option (B) is correct.


So, the correct option is (B) 13। Quick Tip: छंदों की पहचान में विशेष रूप से प्रत्येक चरण की मात्रा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है।


Question 14:

'अध्याय' शब्द में प्रकट उपसर्ग है :

  • (A) अनु
  • (B) अधि
  • (C) अभि
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (B) अधि
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Step 1: Understanding 'अध्यक्ष' शब्द

'अध्यक्ष' शब्द में 'अधि' उपसर्ग है, जो विशेष रूप से किसी चीज़ के ऊपर होने या नेतृत्व करने का संकेत देता है।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "अनु" → 'अनु' उपसर्ग का अर्थ 'निम्न' या 'छोटा' होता है, जो 'अध्यक्ष' में नहीं है।

- (B) "अधि" → यह सही उत्तर है, क्योंकि 'अधि' उपसर्ग 'अध्यक्ष' शब्द में प्रयोग होता है।

- (C) "अभि" → 'अभि' उपसर्ग का अर्थ 'आगे' या 'प्रति' होता है, लेकिन 'अध्यक्ष' में इसका प्रयोग नहीं है।

- (D) "इनमें से कोई नहीं" → यह गलत है, क्योंकि (B) सही उत्तर है।


Step 3: Conclusion

'अधि' उपसर्ग 'अध्यक्ष' शब्द में प्रकट होता है, hence option (B) is correct.


So, the correct option is (B) अधि। Quick Tip: उपसर्गों का सही उपयोग शब्दों के अर्थ और उसके विस्तार को समझने में मदद करता है।


Question 15:

'माता-पिता' में समास है:

  • (A) कर्मधारय समास
  • (B) दिक् समास
  • (C) बहुव्रीहि समास
  • (D) द्वन्द्व समास
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: द्वन्द्व समास वह समास है जिसमें दो समानार्थक शब्द जुड़े होते हैं, जैसे 'माता-पिता', 'रात-दिन' आदि।


Question 16:

'अमृत' का पर्यायवाची शब्द है:

  • (A) जीवन
  • (B) पावन
  • (C) अपीय
  • (D) पिय
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: 'अमृत' का पर्यायवाची 'पावन' होता है, जो किसी चीज के शुद्ध, पवित्र और अमृत समान होने को दर्शाता है।


Question 17:

'युस्मद' तृतीय पुरुष एकवचन का रूप है :

  • (A) तस्यं
  • (B) तत्र
  • (C) तव
  • (D) युष्मासु
Correct Answer: (D) युष्मासु
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Step 1: Understanding 'युस्मद' Usage

'युस्मद' हिंदी व्याकरण में तृतीय पुरुष एकवचन रूप के लिए उपयोग किया जाता है। यह शब्द विशेष रूप से सम्बोधन के लिए प्रयोग में आता है।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "तस्यं" → यह गलत है, क्योंकि तृतीय पुरुष के रूप के लिए 'युस्मद' का प्रयोग नहीं किया जाता।

- (B) "तत्र" → यह गलत है। 'तत्र' का प्रयोग किसी स्थान के लिए होता है।

- (C) "तव" → यह गलत है, क्योंकि 'तव' का प्रयोग वचन के साथ नहीं किया जाता है।

- (D) "युष्मासु" → यह सही उत्तर है, क्योंकि 'युस्मद' का तृतीय पुरुष एकवचन रूप 'युष्मासु' है।


Step 3: Conclusion

'युस्मद' तृतीय पुरुष एकवचन का रूप 'युष्मासु' है, hence option (D) is correct.


So, the correct option is (D) युष्मासु। Quick Tip: व्याकरण में प्रत्येक रूप का सही प्रयोग करने से वाक्य संरचना और अर्थ में स्पष्टता आती है।


Question 18:

रचना के आधार पर वाक्य के भेद हैं :

  • (A) चार
  • (B) तीन
  • (C) छह
  • (D) पाँच
Correct Answer: (A) चार
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Step 1: Understanding Rachna and Its Types

हिंदी में रचना के आधार पर वाक्य के चार भेद होते हैं। इनमें प्रतिवादी, अनुवादी, प्रमाणिक और निष्कर्षात्मक भेद शामिल हैं।


Step 2: Analyzing the options

- (A) "चार" → यह सही उत्तर है, क्योंकि रचना के आधार पर वाक्य के चार भेद होते हैं।

- (B) "तीन" → यह गलत है, क्योंकि वाक्य के भेदों की संख्या तीन नहीं होती।

- (C) "छह" → यह भी गलत है, वाक्य के भेद चार होते हैं।

- (D) "पाँच" → यह गलत है, क्योंकि वाक्य के भेद पाँच नहीं होते।


Step 3: Conclusion

रचना के आधार पर वाक्य के चार भेद होते हैं, hence option (A) is correct.


So, the correct option is (A) चार। Quick Tip: हिंदी व्याकरण के वाक्य भेदों को समझना भाषा के प्रयोग में प्रवीणता लाता है।


Question 19:

भाववाच्य में प्रधानता होती है:

  • (A) कर्म की
  • (B) कर्ता की
  • (C) क्रिया की
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: भाववाच्य में क्रिया की प्रधानता होती है, और यह कर्ता से अधिक महत्वपूर्ण होती है।


Question 20:

विकारी पद के भेद हैं:

  • (A) तीन
  • (B) छ:
  • (C) आठ
  • (D) चार
Correct Answer:
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N/A Quick Tip: विकारी पद के भेद छ: होते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, काल, और कर्म।


Question 21:

उपयुक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ:
यह गद्यांश उस व्यक्ति के बारे में है, जो एक बहुत ही अजीब स्थिति का सामना कर रहा था। वह व्यक्ति एक बुरी स्थिति में था और दीन-हीन था, लेकिन उसकी परिस्थिति के बावजूद वह अपने जीवन में कुछ अच्छा करने का प्रयास कर रहा था। वह कहीं से प्रेरणा प्राप्त करने की कोशिश कर रहा था और उसके द्वारा किए गए कार्यों को साकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। इस गद्यांश में किसी व्यक्ति के संघर्ष, जिजीविषा, और अपने कार्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाया गया है। Quick Tip: संकेत शब्दों का ध्यान रखें, जैसे \textbf{संदर्भ}, जो गद्यांश के भावार्थ और विषय को समझाने में मदद करते हैं।


Question 22:

अकबर ने किसकी स्मृति में मंदिर बनवाया?

Correct Answer:
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अकबर और मंदिर निर्माण:
अकबर ने अपनी संप्रभुता और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण के कारण कई मंदिरों और धार्मिक स्थल का निर्माण करवाया था। उन्होंने न केवल हिंदू धर्म, बल्कि अन्य धर्मों का भी सम्मान किया। अकबर ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को साकारात्मक रूप से अपनाया। उन्होंने ‘‘सातों देश के नोरेश हमायूँ’’ की स्मृति में मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में आज भी अस्तित्व में है और यह अकबर की धर्मनिरपेक्षता को दर्शाता है। Quick Tip: अकबर के धार्मिक दृष्टिकोण और उसकी नीति को समझते हुए, उसके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।


Question 23:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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व्याख्या:
गद्यांश में उल्लिखित शब्दों का महत्व विशेष है, विशेष रूप से ‘‘सातों देश के नोरेश हमायूँ’’ का उल्लेख किया गया है। यह शब्द इस व्यक्ति की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो जीवन में असफलताओं के बावजूद अपने प्रयासों से महान कार्य करता है। उसकी जिजीविषा और अपने जीवन के प्रति प्रतिबद्धता उसे एक प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करती है। गद्यांश का यह भाग हमें यह सिखाता है कि किसी भी स्थिति में जीवन को त्यागने की बजाय, हमें अपनी पूरी मेहनत और प्रयासों से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। Quick Tip: गद्यांश में रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, ध्यान रखना चाहिए कि लेखक के संदेश और प्रेरणा को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए।


Question 24:

उपयुक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ:
यह गद्यांश मानवता और उसकी महत्ता के बारे में है। इसमें एक ऐतिहासिक घटना का विवरण है जिसमें मनुष्य ने अपनी जिजीविषा और विश्वास से अपने कर्तव्यों को निभाया। गद्यांश में यह दिखाया गया है कि जब कोई व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से गुजरता है, तो वह अपने अस्तित्व को बचाने और उच्चतम लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में संघर्ष करता है। यह गद्यांश एक प्रेरणा देता है कि मनुष्य का संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता है और उसे अपने कर्तव्यों से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। इस संदर्भ में लेखक ने उस समय की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को व्यक्त किया है। Quick Tip: गद्यांश का संदर्भ लिखते समय हमें घटनाओं के महत्व और उनके साथ जुड़े संदेशों को संक्षेप में स्पष्ट करना चाहिए।


Question 25:

मानव इतिहास की महत्वपूर्ण घटना कौन सी थी?

Correct Answer:
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महत्वपूर्ण घटना:
मानव इतिहास की महत्वपूर्ण घटना वह क्षण था जब मनुष्य ने अपनी जिजीविषा को साबित किया और अपनी ज़िंदगी को उच्चतर उद्देश्य की ओर मोड़ा। इस गद्यांश में, यह उल्लेख किया गया है कि यह घटना उस समय की थी जब व्यक्ति को अपनी अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा था। यह घटना उस क्षण की थी जब मनुष्य ने संकट के बावजूद अपने मार्ग से न भटकते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लिया था। इस घटना से यह सिद्ध होता है कि मानवता और आत्मविश्वास कभी हार नहीं मानते और हमेशा अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। Quick Tip: महत्वपूर्ण घटनाओं को समझते समय, उन घटनाओं के योगदान और प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रासंगिकता को समझना चाहिए।


Question 26:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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व्याख्या:
रेखांकित अंश में यह कहा गया है कि "आज इस क्षण के ही दो मानव उन सपनों को सब कर दिखाने के लिए क्रियाशील हैं।" इसका तात्पर्य यह है कि इस समय की कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद, वे व्यक्ति अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। यह अंश हमें यह सिखाता है कि संकटों और कठिनाईयों के बावजूद अगर हम अपने उद्देश्य पर दृढ़ रहते हैं, तो कोई भी शक्ति हमें हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने से रोक नहीं सकती। यह गद्यांश एक प्रेरणा देता है कि अगर हम अपने प्रयासों में सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठता को बनाए रखें, तो हम किसी भी मुश्किल से पार पा सकते हैं। Quick Tip: रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, हमें संदेश के सार को समझना चाहिए और यह देखना चाहिए कि वह हमें क्या सिखाता है।


Question 27:

उपयुक्त पाठांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ:
यह गद्यांश एक छोटे से गांव की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जहाँ जीवन का हर पहलू संघर्ष और कठिनाइयों से भरा हुआ है। यह गद्यांश उस समय की सामाजिक स्थिति और मानवता को उजागर करता है, जब व्यक्ति अपनी वास्तविकता और कर्तव्यों को निभाने के लिए संघर्ष करता है। इस संदर्भ में यह गद्यांश हमें यह सिखाता है कि मनुष्य अपनी परिस्थितियों से लड़ते हुए अपने उद्देश्य की ओर बढ़ सकता है। Quick Tip: संदर्भ लिखते समय गद्यांश के केंद्रीय विचार और संदेश को ध्यान में रखें।


Question 28:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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व्याख्या:
गद्यांश में यह रेखांकित अंश बहुत महत्वपूर्ण है। यहां पर यह कहा गया है कि "सभी शिव कालयों में यहां दिखाए गए हैं", इसका तात्पर्य यह है कि सभी कार्य और जीवन में निष्कलंक शिव का रूप देखा जाता है। इस प्रकार, यह अंश हमें यह बताता है कि भगवान का अस्तित्व और उसका प्रभाव हर जगह दिखाई देता है। गद्यांश में दर्शाए गए व्यक्ति का संघर्ष हमें यह सिखाता है कि जीवन में हर चुनौती से उबरने का एक सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए। Quick Tip: रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, इसके प्रमुख संदेश और इसके व्याख्यायित प्रभावों पर ध्यान दें।


Question 29:

'कोई-कोई काँटे से मिलकर' पंक्ति में कौन सा अलंकार है?

Correct Answer:
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अलंकार:
यह पंक्ति "कोई-कोई काँटे से मिलकर" प्रतीकात्मक अलंकार का उदाहरण है। यहां पर 'काँटे' शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया गया है, जो किसी कठिनाई या संघर्ष को दर्शाता है। यह अलंकार उस समय की दर्दनाक और कष्टप्रद परिस्थितियों को चित्रित करता है। लेखक यह बताना चाहता है कि जीवन में कुछ कठिनाइयाँ होती हैं, जो हमें खुद से बाहर निकलने का मार्ग दिखाती हैं। Quick Tip: अलंकार के विभिन्न प्रकारों को पहचानना और उनका सही अर्थ समझना महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब वे किसी साहित्यिक रचना में प्रयुक्त हों।


Question 30:

उपयुक्त पाठांश का शैक्षिक एवं काव्य कृतियों का उद्दीपन कीजिए।

Correct Answer:
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शैक्षिक उद्दीपन:
यह गद्यांश प्रकृति के बारे में है। लेखक यहां पर जल की महिमा को दर्शा रहे हैं। गद्यांश में यह बताया गया है कि कैसे प्रकृति और जल के माध्यम से सुख, शांति, और जीवन का संचरण होता है। जल के महत्व को समझाते हुए, कवि इस विचार को प्रकट कर रहे हैं कि जल ही जीवन का स्रोत है और इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस दृष्टिकोण से यह गद्यांश शैक्षिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जल की आवश्यकताओं के बारे में जागरूक करता है। Quick Tip: प्रकृति और जल के महत्व को समझते हुए, हमें इसे बचाने और इसके प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।


Question 31:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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व्याख्या:
गद्यांश के रेखांकित अंश में कवि ने जल के महत्व को गहराई से प्रस्तुत किया है। वह कहते हैं, "फिर बुदबुदाती है, चलते अब कीनत, पंखुड़ी कहिं किते", इस पंक्ति में जल की हलचल और उसके प्रवाह को व्यक्त किया गया है। इस अंश में प्रकृति के जीवनदायिनी शक्ति का चित्रण किया गया है, जिसमें जल जीवन के लिए आवश्यक है और उसके प्रवाह से ही सब कुछ संभव हो पाता है। यह अंश जीवन और जल के अंतर्संबंध को दर्शाता है और यह हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के हर अंग का अपना स्थान और महत्त्व है। Quick Tip: व्याख्या करते समय पंक्ति के भाव और संदेश को पूरी तरह से समझने की कोशिश करें और उसे सरल शब्दों में स्पष्ट करें।


Question 32:

'पाठांश में प्रसिद्ध "मधुरसर" शब्द का विशेषण-विशेष्य छोटकर लिखिए।'

Correct Answer:
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विशेषण-विशेष्य:
"मधुरसर" शब्द में "मधुर" विशेषण है और "सर" विशेष्य है। इस शब्द का अर्थ है "स्वादिष्ट और सुखद जल", जहाँ "मधुर" जल के स्वाद को और "सर" जल के प्रवाह या प्रभाव को दर्शाता है। इस शब्द का उपयोग गद्यांश में जल की उत्कृष्टता और उसकी विशेषताओं को व्यक्त करने के लिए किया गया है। यह शब्द जल के महत्व को और उसके हर रूप की सुंदरता को दर्शाता है। Quick Tip: विशेषण और विशेष्य के बीच का अंतर समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी शब्द के पूर्ण अर्थ को समझने में मदद करता है।


Question 33:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए :


वाराणसी प्रसिद्धा प्रवीना नगरी। इयं विमलसलिलतरंगाया: गङ्गाया: कूले स्थिता। अस्या: घुणां बलायुक्ति: पंक्तिं धवलां चंद्रिकां बहु राजते। अणगित: परिकर: सुरतेष्य: देशेष्य: नित्यम् अन आयाति, अस्या: घृणां शोभं विलोक्य बहु प्रशंसीति।

Correct Answer:
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वाराणसी सुवक्त्यता प्रवृत्त नगर। एवं विप्रलसितलतरस्त्राया। गंगया : कूलें स्थित। अस्या : घदां बलयाकृतिः पंक्तिः : धवलां चंद्रिकां बहु राजते। अगणित : पर्यतका : सुतुरेष्यः देशस्य : नित्यं अब्र आयानि, अस्यः : धूणां श्रोमं विलोकय बहु प्रशंति।


हिंदी में अनुवाद:
वाराणसी एक प्रसिद्ध नगर है जहाँ पर कई विशिष्ट विशेषताएँ हैं। गंगा नदी इस नगर से बहती है, और यह नगर अपने आकर्षक दृश्य और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान पर चंद्रमा के आलोक में जल का दृश्य और अधिक रोमांचक बन जाता है, और यहाँ के लोग इन दृश्यावलीयों से आनंदित होते हैं। यह नगर सभी तरह की धर्मिक गतिविधियों और कार्यकलापों के लिए प्रसिद्ध है।
Quick Tip: संदर्भ को पूरी तरह से समझने के बाद, अनुवाद करते समय ध्यान दें कि संस्कृत के शब्दों का सही अर्थ हिंदी में दिया जाए।


Question 34:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए :


पुन: ग्रामणो अब्रवीत् 'इदानीं भवनं पूरुषः प्रहिलकाम्' द्रुडदानेन छिन्न: नागरिक: बहुकालं विचार्य न काद्रित् प्रहिलकामं अस्मृत्, अत: अधिकं लक्ष्मण: अब्रवीत्, 'स्वकीयां प्रहिलकां: त्वमेव उत्तं ब्रूहि' तत: स ग्रामिण: बिहस्य स्वप्रहिलकाय: सव्यकं उत्तरं अवदत् 'धर्मं' इति।

Correct Answer:
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संस्कृत गद्यांश:
पुनः ग्रामणो अभिवीत 'इदानीं भवतु प्रच्छतु प्रहेलिकाम्' द्रुतदानेन क्षितिः नागरिकः बहुकालं विचार्य न कासीत् प्रहेलिकाम् अस्तात्, अतः अधिकं लज्जमानः अभवंत्, 'स्वकीयं प्रहेलिकायाः त्वमेतं उत्तरं वृणहि' ततः स ग्रामिणः विहस्य स्वयं प्रहेलिकायाः सपृकं उत्तरं अवदत् 'फणम्' इति।


हिंदी में अनुवाद:
फिर से गाँव में 'इसी तरह से प्रहेलिका को हल किया जाए' कहते हुए नागरिक ने लंबी सोच के बाद यह फैसला लिया कि अब वह इस पहेली का हल स्वयं देने का आदेश देंगे। तब गाँववाले हंसी के साथ इस पहेली का उत्तर दिया 'सांप'।
Quick Tip: संदर्भ को पूरी तरह से समझने के बाद, संस्कृत गद्यांश का हिंदी में सही अनुवाद करें। अनुवाद के समय शब्दों की सही व्याख्या पर ध्यान दें।


Question 35:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए :


न वे तादात्त ताप्नाद् बहिमध्ये

न वे विक्र्यात् वित्सयमानोऽहमसि।

सुपर्णे में मुखं दुःखं तदेकं

यतो मां जना: गुणज्या तोल्यन्ति।

Correct Answer:
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हिंदी अनुवाद:
यह श्लोक बताता है कि मनुष्य को अपने अंदर के दुःखों को छोड़कर उच्च स्थान पर पहुंचने के लिए स्थिरता और धैर्य की आवश्यकता है। बिना शांति और संयम के कोई भी मानसिक एवं भौतिक संघर्ष समाप्त नहीं हो सकता। यहाँ पर यह बताया गया है कि जो लोग जीवन में भटकते हैं, वे निरंतर संघर्ष और बुरे कार्य करते रहते हैं। अंतिम समय में, यदि मनुष्य अपनी आत्मा को शुद्ध करता है, तो वह सुख की प्राप्ति कर सकता है।
Quick Tip: जब भी संस्कृत श्लोक का अनुवाद करें, तो श्लोक के भाव और संदर्भ को पूरी तरह से समझकर ही अनुवाद करें, ताकि आप शब्दों और विचारों का सही अर्थ पा सकें।


Question 36:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए :


अपदो दूरामी च साधरो न च पङ्गित:

अमुष्कं सुकृतं च यो जानाति सं पङ्गित:।

Correct Answer:
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संस्कृत श्लोक:
अपदो दूराणी च साध्रं न च पठितः।
अमुं स्मृतं च यो जानाति सं पठितः॥


हिंदी अनुवाद:
यह श्लोक कहता है कि जो व्यक्ति दूसरों के कष्टों को समझता है और अच्छे कार्य करता है, वही वास्तविक शिक्षा का अधिकारी होता है। इसे किसी भी प्रकार के लिखित शब्दों से नहीं मापा जा सकता। यह श्लोक ज्ञान और शिक्षा के वास्तविक महत्व को दिखाता है। जो लोग अपने जीवन के उद्देश्य को समझते हुए सही मार्ग पर चलते हैं, वे ही सच्चे ज्ञानी होते हैं।
Quick Tip: संस्कृत श्लोकों का अनुवाद करते समय यह सुनिश्चित करें कि श्लोक के भावार्थ को सही रूप में समझ कर लिखें, जिससे श्रोताओं को श्लोक का वास्तविक संदेश मिल सके।


Question 37:

'जय सुभाष' खंडकाव्य के आधार पर सुभाषचंद्र बोस का चित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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सुभाषचंद्र बोस का चित्र-चित्रण:


'जय सुभाष' खंडकाव्य में सुभाषचंद्र बोस की छवि को एक प्रेरणादायक नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनके जीवन को काव्यात्मक रूप से चित्रित करते हुए यह दिखाया गया है कि वह केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक राष्ट्रप्रेमी और एक सशक्त संघर्षकर्ता थे। उनका जीवन स्वतंत्रता संग्राम की एक मिसाल बन चुका है। बोस ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक सशक्त आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने न केवल भारतीय सेना को जागरूक किया, बल्कि उन्हें संगठित भी किया।

सुभाषचंद्र बोस की शख्सियत:

सुभाषचंद्र बोस की शख्सियत में एक दृढ़ इच्छाशक्ति और एक विजयी मनोबल था। वह किसी भी संघर्ष से डरते नहीं थे, बल्कि उन्हें अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हर कठिनाई को पार करने का जुनून था। उनके जीवन में उनके अद्वितीय नेतृत्व कौशल और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति समर्पण को चित्रित किया गया है। इस काव्य में उनका धैर्य, संघर्ष, और स्वतंत्रता की भावना प्रमुख रूप से उभर कर सामने आती है।

'जय सुभाष' खंडकाव्य में उनके द्वारा कहे गए शब्दों और उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को बड़ी ही संवेदनशीलता और भावनाओं के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस काव्य में उनकी क्रांति की दिशा, संघर्ष, और धर्मनिरपेक्षता पर जोर दिया गया है। यह काव्य उनके कार्यों और उनके आत्मबल को उजागर करने के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है।

उनके संघर्षों को इस प्रकार चित्रित किया गया है कि वह न केवल भारत के, बल्कि विश्व के महानतम नेताओं में एक थे।

काव्य का उद्देश्य:

'जय सुभाष' खंडकाव्य का प्रमुख उद्देश्य सुभाषचंद्र बोस के संघर्षों को उजागर करना है। काव्य में उनकी निडरता और कठोरता को व्यक्त किया गया है। वह भारत की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटे थे। उनके काव्य में इस प्रकार की भावनाओं को व्यक्त किया गया है कि आज भी वह हमारे दिलों में जीवित हैं। यह काव्य हमें यह सिखाता है कि संघर्ष के मार्ग पर चलने से हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए। Quick Tip: सुभाषचंद्र बोस के जीवन और उनके संघर्षों को इस काव्य में बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। 'जय सुभाष' के माध्यम से हमें उनका नेतृत्व, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा को समझने का अवसर मिलता है।


Question 38:

'जय सुभाष' खंडकाव्य के प्रथम सर्ग का काव्यात्मक विश्लेषण कीजिए।

Correct Answer:
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प्रथम सर्ग का काव्यात्मक विश्लेषण:

'जय सुभाष' खंडकाव्य का प्रथम सर्ग सुभाषचंद्र बोस की काव्यात्मक छवि को प्रस्तुत करता है। इस सर्ग में उनका व्यक्तित्व एक संघर्षशील और प्रेरणादायक नेता के रूप में सामने आता है। पहले सर्ग में उनके जीवन के शुरुआती क्षणों और उनके उद्देश्यों को गहरे रूप से उकेरा गया है। काव्य में उनके चरित्र की ऐसी विशेषताओं को व्यक्त किया गया है जिनकी वजह से उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सर्ग का काव्य विश्लेषण:

1. सुभाषचंद्र बोस का प्रेरक व्यक्तित्व – पहले सर्ग में उनका व्यक्तित्व एक प्रेरणा स्रोत के रूप में चित्रित किया गया है। उनका आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय उनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। काव्य में दिखाया गया है कि किस प्रकार उन्होंने भारतीय युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया।

2. नेतृत्व कौशल – पहले सर्ग में सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व कौशल का भी उल्लेख किया गया है। वह केवल एक नेता ही नहीं थे, बल्कि एक मार्गदर्शक थे जिन्होंने अपने नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों को संगठित किया। काव्य में उनके नैतिक और सामाजिक नेतृत्व को उजागर किया गया है।

3. संघर्ष और बलिदान – पहले सर्ग में बोस के संघर्ष और बलिदान की भावना को भी व्यक्त किया गया है। इस सर्ग में यह दिखाया गया है कि सुभाषचंद्र बोस ने अपने जीवन के अधिकांश समय को स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित कर दिया और अपने देश के लिए अपनी जान की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटे।

निष्कर्ष:

'जय सुभाष' खंडकाव्य का प्रथम सर्ग न केवल सुभाषचंद्र बोस के जीवन को एक प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत करता है, बल्कि हमें संघर्ष, आत्मविश्वास, और राष्ट्रप्रेम के प्रति जागरूक करता है। काव्य के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि स्वतंत्रता संग्राम में बोस का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। Quick Tip: प्रथम सर्ग के काव्यात्मक विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सुभाषचंद्र बोस का जीवन हमारे लिए एक महान प्रेरणा है और उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।


Question 39:

'अपर्णा' खंडकाव्य के 'पूर्वभाग' का कथात्मक विवरण लिखिए।

Correct Answer:
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अपर्णा खंडकाव्य का पूर्वभाग:


'अपर्णा' खंडकाव्य का पूर्वभाग इस काव्य की मुख्य भूमिका का प्रारंभिक हिस्सा है, जिसमें काव्य की केंद्रीय पात्र अपर्णा की स्थिति और उसकी दुविधाओं को चित्रित किया गया है। इस भाग में अपर्णा की मानसिकता, उसके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं और उसके जीवन के प्रारंभिक संघर्षों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

इस काव्य में अपर्णा की मन:स्थिति और समाज में उसकी स्थिति को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है। वह एक सामान्य महिला के रूप में अपने संघर्षों और सामाजिक अडचनों से जूझती है, जिससे उसकी संघर्षपूर्ण यात्रा को व्यक्त किया गया है। इस हिस्से में हमें अपर्णा के विचारों का चित्रण मिलता है, जिसमें उसके सपने, इच्छाएँ, और समाज के प्रति संवेदनाएँ प्रदर्शित की जाती हैं।

काव्य में अपर्णा के परिवार और समाज से जुड़ी भावनाएँ भी प्रस्तुत की गई हैं, जो उसे समाज के तमाम बंधनों से मुक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं। यह हिस्सा अपर्णा के आंतरिक संघर्ष और नैतिकता की ओर उसकी यात्रा को दिखाता है, जो उसे एक सशक्त और स्वतंत्र महिला के रूप में स्थापित करता है। Quick Tip: 'अपर्णा' के \textbf{पूर्वभाग} में पात्र की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को बड़े ही नाजुक तरीके से चित्रित किया गया है। यह काव्य हमें आत्मसंघर्ष और आत्म-निर्भरता की भावना सिखाता है।


Question 40:

'अपर्णा' खंडकाव्य के आधार पर श्री कृष्ण का चरितांकन कीजिए।

Correct Answer:
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श्री कृष्ण का चरितांकन:


'अपर्णा' खंडकाव्य के आधार पर श्री कृष्ण का चरितांकन एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है। श्री कृष्ण का जीवन और उनके कार्य, इस काव्य में उनके ईश्वरीय रूप और सामाजिक कर्तव्यों का एक अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते हैं। श्री कृष्ण का चरितांकन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

काव्य में श्री कृष्ण के जीवन के प्रमुख घटनाओं का चित्रण किया गया है, जैसे उनका गोवर्धन पर्वत उठाना, कंस का वध, और महाभारत में उनका योगदान। इन घटनाओं के माध्यम से उनके साहस, धैर्य, और सर्वहित की भावना को उजागर किया गया है।

इसके अलावा, श्री कृष्ण का रासलीला और उनके गीता उपदेश भी काव्य में महत्वपूर्ण रूप से चित्रित किए गए हैं। वह न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि एक महान शिक्षक और मार्गदर्शक भी थे, जो हर व्यक्ति को जीवन के उच्चतम आदर्शों की ओर प्रेरित करते थे।

काव्य में श्री कृष्ण की छवि एक निर्देशक और नायक के रूप में प्रस्तुत की गई है, जो समाज और धर्म के लिए एक आदर्श स्थापित करते हैं। Quick Tip: 'अपर्णा' खंडकाव्य में श्री कृष्ण के चरित्र का चित्रण उनके \textbf{सिद्धांतों}, \textbf{कार्य}, और \textbf{उपदेशों} को दर्शाता है, जो आज भी हमें जीवन में सही दिशा प्रदान करते हैं।


Question 41:

(i) 'कर्मवीर भारत' खंडकाव्य के आधिकारिक हिस्से पर केकई की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Correct Answer:
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'कर्मवीर भारत' खंडकाव्य में केकई का चित्रण एक ऐसी महिला के रूप में किया गया है जो अपनी शक्ति और अधिकार का अत्यधिक प्रयोग करती है। केकई का चरित्र दुष्टता और स्वार्थ का प्रतीक है, जो अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है।

केकई के चरित्र का एक प्रमुख पहलू उसकी जिद और महत्वाकांक्षा है। उसे अपने बेटे भरत के लिए राजगद्दी की आवश्यकता थी और वह अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की चालाकी या धोखाधड़ी से पीछे नहीं हटती। केकई का एक और गुण था उसका कठोर निर्णय, जो कभी भी अपने लक्ष्यों से विचलित नहीं होता।

इसके बावजूद, केकई का चरित्र मनुष्य की इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं के बारे में गहरी सोच को उत्पन्न करता है। उसके द्वारा किए गए कृत्य समाज में गलतफहमी और संकट पैदा करते हैं, लेकिन उसे उसके परिवार और बेटे के लिए किए गए कार्यों के रूप में समझा जा सकता है। वह अपने बेटे के लिए राजगद्दी हासिल करने में सफल होती है, लेकिन अपने किए गए कार्यों के परिणामस्वरूप वह अपने जीवन में कई संकटों का सामना करती है।
Quick Tip: केकई के चरित्र का चित्रण करते समय उसके स्वार्थ और दुष्टता को प्रमुख रूप से दर्शाएं, लेकिन यह भी दिखाएं कि वह अपने बेटे के लिए यह सब करती है।


Question 42:

'कर्मवीर भारत' खंडकाव्य के द्वितीय सर्ग 'राजभवन' की कथावस्तु का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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'कर्मवीर भारत' खंडकाव्य का द्वितीय सर्ग 'राजभवन' उस महल और राज्य के कार्यों का चित्रण करता है, जहां भारत के भविष्य और राजकीय व्यवस्था के प्रमुख निर्णय होते हैं। इस सर्ग में, राजा और उनके परिवार के बीच संबंधों का वर्णन किया गया है, जो कि संकीर्ण नीतियों और शक्ति के संघर्ष के कारण उत्पन्न होते हैं।

'राजभवन' में विभिन्न प्रकार की राजनीतिक योजनाओं और चमत्कारी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। यह सर्ग भारतीय समाज की राजनीति और उसके शासन के बारे में गहरी आलोचना प्रस्तुत करता है। इस सर्ग में भारत का नायक पात्र होने के नाते अपने राज्य की रक्षा और कल्याण के लिए अत्यधिक संघर्ष करता है, लेकिन उसे अपनी भूमिका और कर्तव्यों का पालन करते हुए, अपने दुश्मनों से भी जूझना पड़ता है।

'राजभवन' की कथा में शक्ति, संघर्ष और राजनैतिक निर्णयों का अत्यधिक महत्वपूर्ण योगदान है, और इस सर्ग को नायक की आदर्शता, साहस, और संघर्षों की प्रेरक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह सर्ग हमें यह सिखाता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, एक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन में अच्छे निर्णय लेने चाहिए।
Quick Tip: सर्ग की कथावस्तु का वर्णन करते समय उसके प्रमुख घटनाओं और पात्रों के बीच के संघर्ष को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें। नायक के संघर्ष को केंद्रीय भूमिका में रखें।


Question 43:

'कर्ण' खंडकाव्य के आधार पर कुवंती का चरित-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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कुवंती का चरित्र-चित्रण:


'कर्ण' खंडकाव्य में कुवंती का चित्रण एक दुःख और आत्मग्लानि से भरे हुए पात्र के रूप में किया गया है। कुवंती को अपने अविवाहित जीवन में एक अप्रत्याशित संतान का सामना करना पड़ा, जो उनके लिए अत्यधिक कठिनाई और संकोच का कारण बन गया था।

कुवंती का चरित्र इस काव्य में माँ की भूमिका को दर्शाता है, जो अपने पुत्र की संवेदनाओं, संसारिक संघर्षों, और संस्कार को संजोने की कोशिश करती है। हालांकि, वह अपने बेटे कर्ण से नहीं मिल पाई, लेकिन उसकी पहचान को छिपाए रखने के कारण कर्ण की जीवन यात्रा में अपार संघर्ष और विरोध आये। कुवंती की आत्मग्लानि और दर्द उसके व्यक्तित्व का प्रमुख हिस्सा बनते हैं, जो एक मां और बेटे के संबंध को सूक्ष्म रूप से दर्शाता है। Quick Tip: कुवंती का चरित्र काव्य में एक \textbf{माँ} के संघर्ष और \textbf{सकारात्मक बदलाव} को चित्रित करता है, जो उसके पुत्र कर्ण से जुड़े हुए हैं।


Question 44:

'कर्ण' खंडकाव्य के प्रमुख प्रसंगों की कंठस्थु लिखिए।

Correct Answer:
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कर्ण खंडकाव्य के प्रमुख प्रसंग:


'कर्ण' खंडकाव्य में कर्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को विस्तार से और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कर्ण का जीवन संघर्ष, त्याग और सामाजिक अन्याय से भरा हुआ था।

काव्य के प्रमुख प्रसंगों में कर्ण का जन्म, उसका दुःख, और उसके साथ किये गए सामाजिक भेदभाव को प्रमुख रूप से चित्रित किया गया है। कर्ण की प्रसिद्ध दानवीरता, उसका कृष्ण से द्वंद्व, और महाभारत के युद्ध में उसकी भूमिका को भी सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया है।

कर्ण का यह जीवन त्याग, साहस, और समाज की विकृतियों से जूझते हुए आगे बढ़ने का प्रतीक है। Quick Tip: 'कर्ण' खंडकाव्य में कर्ण की \textbf{दानवीरता} और \textbf{संघर्ष} को एक प्रेरणादायक रूप में दर्शाया गया है, जो सामाजिक असमानताओं और अपने कर्तव्यों से जुड़ी है।


Question 45:

(i) 'मेवाड़ मुक्त' खंडकाव्य के आधार पर महाराणा प्रताप का चरित्रांकन कीजिए।

Correct Answer:
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'मेवाड़ मुक्त' खंडकाव्य में महाराणा प्रताप का चरित्र अत्यंत प्रेरणादायक और वीरतापूर्ण है। इस काव्य में उनके संघर्ष, साहस, और धैर्य का चित्रण किया गया है। महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना युद्ध लड़ा। उनका जीवन उनके अद्वितीय नेतृत्व और बलिदान का प्रतीक बन गया। इस खंडकाव्य में महाराणा प्रताप की वीरता, उनके समर्पण, और उनके द्वारा मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को प्रमुखता से दर्शाया गया है। उनके संघर्षों में उनके साथियों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा, जो अंततः उनकी विजय की ओर मार्गदर्शन करते हैं।

महाराणा प्रताप की सेना में उनके विश्वास और उनके नेतृत्व की विशेषता न केवल उनकी विजय में बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता और साहस में भी प्रकट होती है। वह एक महान नेता, सेनापति, और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए अनगिनत बलिदान दिए। उनका चरित्र आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। Quick Tip: महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह सिखाता है कि अपने धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में संघर्ष करना चाहिए, और कभी हार नहीं माननी चाहिए।


Question 46:

'मेवाड़ मुक्त' खंडकाव्य के आधार पर चौथी सर्ग 'दौलत' की कथावस्तु का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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'मेवाड़ मुक्त' खंडकाव्य के चौथे सर्ग 'दौलत' में काव्यकार ने मुख्य रूप से समृद्धि, धन और साम्राज्य की नीतियों को चित्रित किया है। इस सर्ग में दौलत के प्रभाव और उसका साम्राज्य के विभिन्न पहलुओं पर असर को बताया गया है। दौलत केवल धन का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्तियों से भी है।

इस सर्ग में काव्यकार ने दौलत के साथ जुड़ी महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया है, जैसे कि उसकी भूमिका राजनैतिक निर्णयों में, और कैसे उसके प्रभाव से समाज में विभिन्न परिवर्तन होते हैं। यह सर्ग समाज में दौलत और उसके प्रभाव का गहरा चित्रण करता है, और यह भी दिखाता है कि कैसे धन और शक्ति का गलत उपयोग समाज को असंतुलित कर सकता है।

सर्ग के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया है कि दौलत का उद्देश्य केवल भोग विलास नहीं, बल्कि समाज की भलाई और विकास होना चाहिए। दौलत का सही उपयोग राष्ट्र के हित में और जनकल्याण के लिए होना चाहिए, और इसके नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए इसका सही दिशा में प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। Quick Tip: धन और दौलत का वास्तविक उद्देश्य जनकल्याण और समाज के विकास में होना चाहिए, न कि केवल भोगविलास में। यह काव्य हमें यह संदेश देता है कि धन का सही उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए।


Question 47:

(i) 'तुमुल' खंडकाव्य के आधार पर मेघनाद का चरित्रांकन कीजिए।

Correct Answer:
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'तुमुल' खंडकाव्य में मेघनाद का चित्रण एक वीर और साहसी योद्धा के रूप में किया गया है। वह रावण के बेटे के रूप में जन्मा था और अपने पिता की तरह शक्तिशाली और योग्य था। मेघनाद का मुख्य गुण उसकी वीरता, रण कौशल, और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा है।

मेघनाद के चरित्र का प्रमुख पहलू उसकी अद्वितीय वीरता है। वह न केवल युद्ध में माहिर था, बल्कि उसने बहुत सारी युद्ध रणनीतियों को अपनाया और अनेक महत्वपूर्ण विजय प्राप्त की। मेघनाद ने अपनी वीरता और साहस के साथ अपने शत्रुओं को हराया, और वह अपनी शक्ति को अपने परिवार और राज्य की सुरक्षा के लिए प्रयोग करता था।

इसके अतिरिक्त, मेघनाद का एक महत्वपूर्ण गुण उसकी निष्ठा और समर्पण है। वह अपने पिता रावण के प्रति अत्यधिक निष्ठावान था और अपने पिता के आदेशों का पालन करता था। उसकी यह निष्ठा उसे एक आदर्श पुत्र और योद्धा बनाती है।

इस प्रकार, मेघनाद का चरित्र एक शक्तिशाली और समर्पित योद्धा के रूप में दर्शाया गया है, जो अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देता है और अपने परिवार और राज्य की रक्षा के लिए हर तरह से संघर्ष करता है।
Quick Tip: किसी भी पात्र का चरित्रांकन करते समय उसके गुण, दोष, और उसके उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।


Question 48:

'तुमुल' खंडकाव्य के किसी एक सर्ग का कथानक लिखिए।

Correct Answer:
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'तुमुल' खंडकाव्य का एक प्रमुख सर्ग 'रावण का मरण' है, जिसमें रावण और राम के बीच का संघर्ष और युद्ध का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह सर्ग नायक और खलनायक के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।

इस सर्ग में रावण, जो कि एक अत्यंत शक्तिशाली और निडर शासक था, राम के साथ युद्ध करने के लिए तैयार होता है। रावण ने अपने राज्य की रक्षा के लिए और अपने परिवार की आन को बचाने के लिए युद्ध की घोषणा की थी। दूसरी ओर, राम, जो धर्म के रक्षक थे, ने रावण के अत्याचारों का विरोध किया और उसे न्याय की ओर लाने के लिए युद्ध छेड़ा।

इस सर्ग के दौरान, दोनों सेनाएँ युद्ध भूमि पर आमने-सामने होती हैं, और रावण के नाश के लिए राम की सेना पूरी शक्ति से युद्ध करती है। इस सर्ग में युद्ध की रणनीतियाँ, वीरता, बलिदान और संघर्ष के विभिन्न पहलुओं का बारीकी से वर्णन किया गया है।

युद्ध के अंत में, राम रावण को परास्त करते हैं, और रावण का मरण उस युद्ध का निष्कर्ष होता है। यह सर्ग हमें यह सिखाता है कि धर्म और सत्य की विजय होती है, और अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित होता है।
Quick Tip: सर्ग के कथानक का वर्णन करते समय उसकी घटनाओं, पात्रों के संघर्ष और उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से जोड़ें।


Question 49:

'मुक्तिदूत' खंडकाव्य के आधार पर महात्मा गांधी की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Correct Answer:
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महात्मा गांधी का चारित्रिक चित्रण:


'मुक्तिदूत' खंडकाव्य में महात्मा गांधी को एक सत्य और अहिंसा के पक्के अनुयायी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक नेता के रूप में कार्य किया और उनके द्वारा उठाए गए कदमों ने राष्ट्र को एकजुट किया। गांधी जी की साधना, न्याय, और समाज सुधार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता काव्य में स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है। गांधी जी के व्यक्तित्व की चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. सत्य और अहिंसा के प्रति विश्वास – गांधी जी ने जीवन भर सत्य और अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका मानना था कि सत्य का पालन करना और अहिंसा को सर्वोपरि रखना समाज को एक अच्छा रास्ता दिखाता है।
2. समाज सेवा – महात्मा गांधी ने समाज के लिए अपना समर्पण दिखाया और समाज में फैली असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास किया।
3. नैतिकता – गांधी जी ने जीवनभर नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन किया, उन्होंने हमेशा अपने कर्मों और आचरण में नैतिकता को प्राथमिकता दी।

निष्कर्ष: महात्मा गांधी का व्यक्तित्व एक प्रेरणा है, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को सत्य, अहिंसा, और नैतिकता के मार्ग पर चलाया। Quick Tip: महात्मा गांधी की चारित्रिक विशेषताएँ सत्य, अहिंसा, और समाज सेवा की भावना से प्रेरित हैं। उनका जीवन हमें \textbf{सत्य} और \textbf{नैतिक} मूल्यों के पालन का पाठ पढ़ाता है।


Question 50:

'मुक्तिदूत' खंडकाव्य के द्वितीय सर्ग का वर्णन कीजिए।

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मुक्तिदूत' खंडकाव्य के द्वितीय सर्ग का वर्णन:


'मुक्तिदूत' के द्वितीय सर्ग में महात्मा गांधी की विचारधारा और संघर्ष की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। इस सर्ग में गांधी जी के समाज सुधारक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विचारों का विस्तृत रूप से चित्रण किया गया है। इस खंडकाव्य का द्वितीय सर्ग विशेष रूप से धर्म और नैतिकता के महत्व को दर्शाता है।

1. धार्मिक चिंतन – द्वितीय सर्ग में गांधी जी के धार्मिक विचारों की गहराई को व्यक्त किया गया है। उन्होंने धर्म को सत्य और अहिंसा के साथ जोड़ा, जो उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था।
2. समाज सेवा की प्रेरणा – इस सर्ग में गांधी जी ने समाज में फैले अंधविश्वास और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और सभी वर्गों के लिए समान अधिकारों की बात की।
3. संघर्ष का चित्रण – द्वितीय सर्ग में गांधी जी के संघर्ष का चित्रण किया गया है, जिसमें उनके आत्मबल और निडरता को दर्शाया गया है। इस सर्ग में गांधी जी की आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन यात्रा को बखूबी दिखाया गया है।

निष्कर्ष: द्वितीय सर्ग का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि गांधी जी का जीवन न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रेरित था, बल्कि उनके समाज सुधारक कदम भी इस खंडकाव्य में उजागर होते हैं। Quick Tip: द्वितीय सर्ग में महात्मा गांधी के \textbf{सामाजिक सुधार} और \textbf{आध्यात्मिक दृष्टिकोण} का संकलन है, जो हमें अपने समाज की सेवा करने की प्रेरणा देता है।


Question 51:

(i) 'मातृभूमि के लिए' खंडकाव्य के आधार पर चंद्रशेखर 'आजाद' का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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'मातृभूमि के लिए' खंडकाव्य में चंद्रशेखर आजाद का चित्रण अत्यंत प्रेरणादायक और साहसिक है। चंद्रशेखर आजाद भारत की स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों में से एक थे। उनका जीवन संपूर्ण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। काव्य में उनके संघर्ष, बलिदान, और भारतीय स्वतंत्रता के प्रति उनके समर्पण को विशेष रूप से चित्रित किया गया है।

आजाद ने हमेशा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी पूरी ताकत और समर्पण से भाग लिया। उनका विश्वास था कि स्वतंत्रता एक महान उद्देश्य है, जिसके लिए किसी भी प्रकार के बलिदान से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को काव्य में दर्शाया गया है, जैसे उनका शहीद होने का समय और उनका आखिरी संघर्ष। उनका चरित्र दिखाता है कि अपने देश के प्रति प्रेम और सेवा का मार्ग हमेशा कठिन होता है, लेकिन वह सही मार्ग पर चलने के लिए साहस और धैर्य बनाए रखते थे।

चंद्रशेखर आजाद ने हमेशा अपने आदर्शों और स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए कड़ी मेहनत की। उनकी निडरता, साहस, और निष्ठा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर रहेगी। Quick Tip: चंद्रशेखर आजाद का जीवन हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता की कीमत केवल संघर्ष और बलिदान के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। उनके साहस और समर्पण को याद करना हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


Question 52:

'मातृभूमि के लिए' खंडकाव्य के आधार पर 'सम्राट' सर्ग की कथावस्तु लिखिए।

Correct Answer:
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'मातृभूमि के लिए' खंडकाव्य के 'सम्राट' सर्ग में काव्यकार ने सम्राट के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का चित्रण किया है। इस सर्ग में सम्राट की वीरता, नेतृत्व क्षमता, और उसकी नीतियों को स्पष्ट रूप से दिखाया गया है। सम्राट ने अपने राज्य की प्रजा की भलाई के लिए कई सुधार किए और अपनी सत्ता का उपयोग न्याय और धर्म की स्थापना के लिए किया।

सम्राट का चरित्र एक आदर्श नेता के रूप में चित्रित किया गया है, जो न केवल अपनी सत्ता और शक्ति को समझता था, बल्कि वह अपने राज्य के प्रत्येक नागरिक की भलाई के लिए कार्य करता था। उनके द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों से राज्य में शांति और समृद्धि आई। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि किसी भी महान व्यक्ति का कार्य केवल अपने लिए नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए होना चाहिए।

इस सर्ग में सम्राट के नेतृत्व में राष्ट्र की प्रगति, उनकी नीतियाँ और उनके साम्राज्य के विस्तार को प्रमुख रूप से चित्रित किया गया है। यह काव्य सर्ग यह बताता है कि एक अच्छा शासक वह होता है जो अपने राज्य को धर्म और सत्य के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है। Quick Tip: सम्राट का जीवन हमें यह सिखाता है कि सत्ता का सही उपयोग समाज की भलाई के लिए होना चाहिए। उनका नेतृत्व हमें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी राज्य का वास्तविक उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है।


Question 53:

(i) 'ज्योति जवाहर' खंडकाव्य के आधार पर लोकनायक 'जवाहरलाल नेहरू' की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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'ज्योति जवाहर' खंडकाव्य में जवाहरलाल नेहरू का चित्रण एक महान नेता के रूप में किया गया है, जो भारतीय राजनीति में अपने विचारों, दृष्टिकोणों और कार्यों के लिए प्रसिद्ध रहे। उनका जीवन, उनके विचार, और उनके कार्य न केवल उनके देश के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा स्रोत बने।

नेहरू जी का चरित्र साहस, त्याग, और अपने देश के लिए अनगिनत बलिदानों से भरा हुआ है। उनकी चारित्रिक विशेषताओं में उनकी दूरदृष्टि, अनुशासन, और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनका समर्पण प्रमुख है। वे एक सशक्त और प्रेरक नेता थे, जिनके नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की और विकास के मार्ग पर अग्रसर हुआ।

नेहरू जी का व्यक्तित्व सभी भारतीयों के लिए आदर्श था। उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा दी और देश को एकजुट किया। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान भारतीय राष्ट्रीय धारा में उनके विचारों की स्थिरता और विकास था। वे सामाजवादी सिद्धांतों के पक्षधर थे और उनका मानना था कि शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहिए।

उनका आदर्श नेतृत्व और उनकी मानवतावादी दृष्टि भारतीय राजनीति में दीर्घकालिक परिवर्तन का कारण बनी। उनका जीवन एक सच्चे राष्ट्रीय नायक के रूप में हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है।
Quick Tip: जब आप नेहरू जी के चरित्र का वर्णन करें, तो उनके महान कार्यों, विचारों और नेतृत्व की विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत करें। उनके जीवन से हमें जो प्रेरणा मिलती है, उसे भी जोड़ें।


Question 54:

'ज्योति जवाहर' खंडकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।

Correct Answer:
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'ज्योति जवाहर' खंडकाव्य का कथानक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता जवाहरलाल नेहरू के जीवन और उनके संघर्षों के बारे में है। इस काव्य का उद्देश्य नेहरू जी के जीवन के संघर्ष, उनके विचार और उनके योगदान को चित्रित करना है।

काव्य की शुरुआत नेहरू जी के बचपन और उनके परिवार के बारे में होती है, जिसमें उनके पिता मोतीलाल नेहरू का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसके बाद नेहरू जी के शिक्षा जीवन, उनके स्वाधीनता संग्राम में योगदान, और उनके नेतृत्व की भूमिका को उजागर किया गया है।

इस काव्य में नेहरू जी की विभिन्न विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है, जैसे उनका साहस, राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा, और उनकी विचारधारा। इसके अलावा, उनके जीवन में आने वाली कठिनाइयों और संघर्षों का भी जिक्र किया गया है।

काव्य के अंत में, नेहरू जी का आदर्श जीवन, उनकी देशभक्ति, और उनके कार्यों का अनुसरण करने की प्रेरणा दी जाती है। यह काव्य भारतीय नागरिकों के लिए एक प्रेरणा बन गया, जो राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए उत्साहित होते हैं।
Quick Tip: काव्य का कथानक लिखते समय नेहरू जी के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों, उनके योगदान और संघर्षों को स्पष्ट रूप से जोड़ें। साथ ही उनके आदर्श और प्रेरणादायक जीवन को भी प्रस्तुत करें।


Question 55:

'जयशंकर प्रसाद' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय:
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के महान कवि, नाटककार और कहानीकार थे। उनका जन्म 30 जनवरी 1889 को हुआ था। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उनके लेखन में प्रकृति, प्रेम, और मानवता के गहरे विषयों का चित्रण मिलता है। प्रसाद जी की कविता और नाटक समाज की जटिलताओं और भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। उनका साहित्य शास्त्र, धर्म और समाज के सशक्त रिश्तों को रेखांकित करता है।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. कामायनी – यह जयशंकर प्रसाद की सबसे प्रसिद्ध काव्य रचना है, जो मानवता और संस्कारों की गहरी परिभाषा देती है।
2. तितली – एक छोटी सी कहानी जो जीवन के अनमोल अनुभवों को प्रस्तुत करती है।

जयशंकर प्रसाद जी ने साहित्य में अपनी अमूल्य धरोहर छोड़ी है जो आज भी हमें प्रेरित करती है। Quick Tip: \textbf{कामायनी} जयशंकर प्रसाद की काव्य रचना है, जो गहरी \textbf{आध्यात्मिकता} और \textbf{मानव मनोविज्ञान} को प्रदर्शित करती है।


Question 56:

'जयप्रकाश भारती' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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जयप्रकाश भारती का जीवन परिचय:
जयप्रकाश भारती एक प्रतिष्ठित हिंदी कवि और लेखक थे। उनका जन्म 1925 में हुआ था। उनका साहित्य लेखन शहरी और ग्रामीण जीवन की गहरी समझ को प्रदर्शित करता है। भारती जी की कविता और कहानियाँ सामाजिक असमानताओं और भारतीय समाज के संघर्षों को चित्रित करती हैं।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. ग्राम्य शृंगारी – यह काव्य रचना गांव और उसकी संस्कृति की सुंदरता को व्यक्त करती है।
2. विप्लव की गाथा – यह रचना स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों और उसमें समाज के योगदान को दर्शाती है।

जयप्रकाश भारती जी के काव्य और लेखन ने हमें समाज की गहरी और जटिल वास्तविकताओं को समझने का अवसर दिया। Quick Tip: जयप्रकाश भारती की काव्य रचनाएँ \textbf{ग्राम्य जीवन} और \textbf{स्वतंत्रता संग्राम} की ऐतिहासिक गाथाओं को जीवित करती हैं।


Question 57:

'डॉ. राजेन्द्र प्रसाद' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय:
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय राजनीति के महान नेता थे। उनका जन्म 1884 में हुआ था। वे भारत के पहले राष्ट्रपति थे और स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। उनके नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के विचार और कार्य समाज सेवा और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्त्रोत हैं।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. आत्मकथा – यह उनकी जीवनी है, जिसमें उन्होंने अपनी जीवन यात्रा और संघर्षों को व्यक्त किया है।
2. भारत की राजनीति और मैं – इस पुस्तक में डॉ. प्रसाद ने भारतीय राजनीति और उसके आदर्शों पर अपनी गहरी सोच व्यक्त की है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के योगदान से भारतीय राजनीति और समाज में कई सकारात्मक बदलाव आए। Quick Tip: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की \textbf{आत्मकथा} हमें उनके संघर्षों और स्वतंत्रता संग्राम की असली तस्वीर प्रस्तुत करती है।


Question 58:

'डॉ. भगवतशरण उपाध्याय' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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डॉ. भगवतशरण उपाध्याय का जीवन परिचय:
डॉ. भगवतशरण उपाध्याय एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक और आलोचक थे। उनका जन्म 1914 में हुआ था। वे भारतीय साहित्य में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी आलोचना में गहरी सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समझ प्रदर्शित होती है। उनका लेखन भारतीय समाज के कई पहलुओं को दर्शाता है।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. साहित्य और समाज – यह डॉ. उपाध्याय की प्रसिद्ध आलोचनात्मक रचना है, जो साहित्य और समाज के संबंधों को उजागर करती है।
2. रचनात्मक प्रक्रिया – इस पुस्तक में डॉ. उपाध्याय ने साहित्यिक रचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है।

डॉ. भगवतशरण उपाध्याय के विचार और लेखन ने हमें साहित्य की गंभीरता और उसकी सामाजिक भूमिका को समझने का अवसर दिया। Quick Tip: डॉ. भगवतशरण उपाध्याय की \textbf{साहित्य और समाज} रचना साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर मानी जाती है।


Question 59:

'मैथिलीशरण गुप्त' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय:
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 1886 में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के महान कवि थे। उनका योगदान हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने में अतुलनीय है। गुप्त जी ने अपनी कविताओं में भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रप्रेम की गहरी भावनाओं को व्यक्त किया। उनका लेखन विशेष रूप से राष्ट्रभक्ति और समाज सुधार पर आधारित था।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. भारत-भारती – यह गुप्त जी की सबसे प्रसिद्ध रचना है, जिसमें उन्होंने भारत के इतिहास, संस्कृति, और सभ्यता का अद्भुत चित्रण किया है।
2. साकेत – यह काव्य रचना राम के जीवन के नैतिक संघर्ष और धर्म की महत्वपूर्ण पहचान है।

मैथिलीशरण गुप्त जी के काव्य ने हिंदी साहित्य में एक नया मोड़ दिया और उन्हें राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाया। Quick Tip: \textbf{भारत-भारती} और \textbf{साकेत} जैसे काव्य रचनाएँ मैथिलीशरण गुप्त के \textbf{समाज सुधारक} दृष्टिकोण और \textbf{राष्ट्रभक्ति} को दर्शाती हैं।


Question 60:

'बिहारीलाल' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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बिहारीलाल का जीवन परिचय:
बिहारीलाल हिंदी साहित्य के महान कवि और नाटककार थे। उनका जन्म 1595 में हुआ था। वे काव्य रचनाएँ और नैतिक शिक्षा के लिए प्रसिद्ध थे। उनका लेखन समाज को जागरूक करने और नैतिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। बिहारीलाल जी के काव्य में प्रेम और नैतिकता की गहरी समझ देखने को मिलती है।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. बीहारी की दोहावली – यह काव्य रचना प्रेम और सत्य के आदर्शों को प्रदर्शित करती है।
2. नीति-शतक – यह रचना जीवन के नैतिक मूल्यों और शिक्षा पर आधारित है।

बिहारीलाल जी का साहित्य आज भी हमें नैतिकता और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। Quick Tip: \textbf{बीहारी की दोहावली} बिहारीलाल की प्रसिद्ध रचना है, जो जीवन के \textbf{नैतिक} और \textbf{सामाजिक} पक्षों को दर्शाती है।


Question 61:

'सुमित्रानंदन पंत' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय:
सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि थे, जिनका जन्म 1900 में हुआ था। वे छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक थे और उनके काव्य में प्रकृति, प्रेम, और आध्यात्मिकता के गहरे भाव थे। उनकी कविता में जीवन की सुंदरता और मानवता की पहचान की गई है।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. कुमारी – यह कविता प्रेम और भावनाओं की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।
2. निराला – यह काव्य रचना सुमित्रानंदन पंत के जीवन और दृष्टिकोण की गहरी समझ को दर्शाती है।

सुमित्रानंदन पंत जी की कविता में प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिकता का अद्भुत मिश्रण मिलता है। Quick Tip: सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ \textbf{प्राकृतिक सौंदर्य} और \textbf{आध्यात्मिक दृष्टिकोण} से भरपूर हैं।


Question 62:

'अशोक वाजपेयी' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रसिद्ध रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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अशोक वाजपेयी का जीवन परिचय:
अशोक वाजपेयी हिंदी के प्रसिद्ध कवि, आलोचक और साहित्यकार थे। उनका जन्म 1941 में हुआ था। वाजपेयी जी की कविता में जीवन के गहरे अनुभवों और आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य का अद्भुत मिश्रण है। उनकी काव्य रचनाएँ समाज की जटिलताओं, मानसिक संघर्षों, और सांस्कृतिक चेतना पर आधारित होती हैं।

प्रसिद्ध रचनाएँ:
1. वो जो था – यह काव्य रचना जीवन के संघर्ष और दुःख को व्यक्त करती है।
2. काव्य का आत्मा – यह काव्य रचना कविता के वास्तविक उद्देश्य और उसके प्रभाव को स्पष्ट करती है।

अशोक वाजपेयी जी की कविता हमें जीवन और समाज के गहरे अर्थों को समझने की प्रेरणा देती है। Quick Tip: अशोक वाजपेयी की काव्य रचनाएँ हमें \textbf{जीवन के गहरे पहलुओं} और \textbf{आध्यात्मिक चेतना} को समझाती हैं।


Question 63:

अपनी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड से कठिन कोई एक शलोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।

Correct Answer:
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यह शलोक ‘भगवद गीता’ के चौथे अध्याय से लिया गया है। यह शलोक कर्म के महत्व और उस पर ध्यान देने का उपदेश देता है। शलोक का रूप इस प्रकार है:



"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥"


व्याख्या:
यह शलोक जीवन में कर्म करने का उपदेश देता है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह बताया कि हमें केवल अपने कर्मों को पूरी निष्ठा से करना चाहिए, लेकिन उसके फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। फल की प्राप्ति पर हमारा अधिकार नहीं होता, हमें केवल कर्म करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर हम अपने कार्यों को निष्कलंक रूप से करेंगे, तो बिना किसी स्वार्थ के हम अंततः सफल होंगे। यह शलोक हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है, चाहे उसके परिणाम कुछ भी हों।
Quick Tip: \textbf{इस शलोक में भगवान श्री कृष्ण ने यह सिखाया है कि जीवन में कर्मों का सही तरीके से पालन करना चाहिए, और किसी भी कार्य के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।}


Question 64:

विद्यालय में खेलकूद की सामग्री की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।

Correct Answer:
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प्रिय प्रधानाचार्य,


सादर प्रणाम। मैं, [तुम्हारा नाम], कक्षा [कक्षा का नाम] का छात्र/छात्रा, विद्यालय में खेलकूद की सामग्री के विषय में आपको एक पत्र लिख रहा हूँ। हमारे विद्यालय में खेलकूद की सामग्री की स्थिति काफी खराब हो गई है। कई उपकरण पुरानी अवस्था में हैं और कुछ खेल सामग्री तो पूरी तरह से खराब हो चुकी है।

समस्या:
हमारे विद्यालय के खेलकूद कक्ष में खेलों के लिए आवश्यक सामान जैसे बैडमिंटन रैकेट, क्रिकेट बैट, फुटबॉल, क्रिकेट बॉल आदि की स्थिति सही नहीं है। इनका इस्तेमाल करने में छात्रों को कठिनाई होती है, और हमें उचित अभ्यास नहीं मिल पाता है।

सुझाव:
मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि शीघ्र ही खेलकूद की सामग्री को ठीक करवा लिया जाए, ताकि छात्रों को खेलकूद के क्षेत्र में अपनी क्षमता को बेहतर बनाने का अवसर मिल सके।

कृपया इस विषय में शीघ्र निर्णय लें, ताकि हम सभी विद्यार्थियों को अच्छा अनुभव मिल सके।

आपका छात्र/छात्रा,

[तुम्हारा नाम] Quick Tip: विद्यालय में खेलकूद सामग्री का होना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। समय-समय पर इसकी मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जाना चाहिए।


Question 65:

किसी पर्यटन स्थल का वर्णन करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखिए कि वह भी कुछ दिनों के लिए आपके पास आ जाए।

Correct Answer:
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प्रिय मित्र,


सादर प्रणाम।


आशा है कि तुम स्वस्थ और खुशहाल रहोगे। मुझे तुम्हें एक बहुत ही सुंदर पर्यटन स्थल के बारे में बताने का अवसर मिल रहा है, जो मेरे शहर के पास स्थित है। यहाँ पर हरियाली, पहाड़, झीलें और मंदिरों की भरमार है। मैंने हाल ही में यहाँ की यात्रा की और मैं चाहूँगा कि तुम भी यहाँ आओ और इसका आनंद लो।

यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है और पर्यटकों के लिए आदर्श है। यहाँ के मंदिर और ऐतिहासिक स्थल बहुत प्रसिद्ध हैं। तुम अगर इस जगह पर आओगे तो हमें साथ में घूमने का मौका मिलेगा। यह यात्रा तुम्हारे लिए बहुत आनंददायक रहेगी।

मैं तुम्हें सुझाव दूँगा कि तुम अगले महीने के अंत तक यहाँ आओ। मैं तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा हूँ और तुम्हें यहाँ का हर एक स्थान दिखाऊँगा। मुझे विश्वास है कि तुम्हें यह यात्रा बहुत पसंद आएगी।

तुम्हारा मित्र,


[तुम्हारा नाम] Quick Tip: यात्रा करते समय उस स्थान के प्राकृतिक और सांस्कृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहिए। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि नए अनुभव भी देता है।


Question 66:

अलक्षेंद्र: का: आसीत?

Correct Answer:
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यह वाक्य एक प्रश्नवाचक वाक्य है, जिसमें 'अलक्षेंद्र' नामक व्यक्ति के बारे में पूछा जा रहा है। इसका हिंदी में अनुवाद होगा: "अलक्षेंद्र कौन थे?" यह वाक्य व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से पूछा जाता है। यहाँ 'का' से तात्पर्य 'कौन' से है।
Quick Tip: संस्कृत में प्रश्नवाचक वाक्य में 'का' का प्रयोग सामान्यतः व्यक्ति या वस्तु से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।


Question 67:

दुरग्र: कुत्र नास्ति?

Correct Answer:
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यह वाक्य भी एक प्रश्नवाचक वाक्य है, जिसका हिंदी अनुवाद होगा: "दुरगम कहाँ नहीं है?" यहाँ 'दुरगम' का अर्थ है 'जो कठिन हो' या 'जो पहुँचना मुश्किल हो', और इस वाक्य में यह पूछा जा रहा है कि ऐसा कौन सा स्थान है, जो दुरगम नहीं है।
Quick Tip: संस्कृत में 'नास्ति' का अर्थ होता है 'नहीं है', और यह वाक्य किसी स्थान या वस्तु की अनुपस्थिति के बारे में सवाल करता है।


Question 68:

भूमे: गुरुतरं किम् अस्ति?

Correct Answer:
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यह वाक्य एक प्रश्नवाचक वाक्य है, जिसका हिंदी अनुवाद होगा: "भूमि में सबसे भारी क्या है?" यहाँ 'गुरुतरं' का अर्थ 'सबसे भारी' है, और इस वाक्य में पृथ्वी या भूमि में सबसे भारी वस्तु के बारे में पूछा जा रहा है।
Quick Tip: 'गुरुतरं' शब्द संस्कृत में 'भारी' का पर्याय है, और यह प्रश्न भार के संदर्भ में पूछा जाता है।


Question 69:

कृप: किमर्थं दु:खं अनुभवति?

Correct Answer:
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यह वाक्य एक प्रश्नवाचक वाक्य है, जिसका हिंदी अनुवाद होगा: "कृप क्यों दुख अनुभव करती हैं?" यहाँ 'कृप' का संदर्भ किसी विशेष व्यक्ति या पात्र से है, और यह पूछा जा रहा है कि वह दुख क्यों महसूस करती हैं। इस वाक्य में किसी के आंतरिक संघर्ष या पीड़ा के बारे में पूछा जा रहा है।
Quick Tip: 'किमर्थं' का अर्थ होता है 'क्यों', और यह वाक्य किसी व्यक्ति या पात्र के दुख या पीड़ा के कारण को जानने के लिए पूछा जाता है।


Question 70:

‘साम्प्रदायिकता: एक अभिशाप’ पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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साम्प्रदायिकता समाज के लिए एक अभिशाप है। यह हमारे समाज को कई हिस्सों में बांटकर सामाजिक असमानता और हिंसा को बढ़ावा देता है। साम्प्रदायिकता की जड़ें हमारे समाज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में बसी हुई हैं। यह विभाजन लोगों के बीच नफरत और असहमति पैदा करता है।

साम्प्रदायिकता के कारण:

1. धार्मिक कट्टरवाद – कुछ लोग अपने धार्मिक विश्वासों को दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं, जिससे समाज में तनाव और असहमति उत्पन्न होती है।

2. राजनीतिक फायदा – कुछ नेता साम्प्रदायिक मुद्दों को भड़काकर अपनी राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

3. अशिक्षा और जागरूकता की कमी – लोग जब तक शिक्षित नहीं होते, तब तक वे साम्प्रदायिकता के जाल में फंस जाते हैं।


समाधान:

1. शिक्षा और जागरूकता – शिक्षा के माध्यम से हम समाज में साम्प्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दे सकते हैं।

2. समाज में समानता – समाज में समानता और न्याय का प्रचार करना चाहिए, ताकि साम्प्रदायिक भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

3. सरकार की भूमिका – सरकार को ऐसे कानून बनाने चाहिए जो साम्प्रदायिक उन्माद को रोक सकें और सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करें।


निष्कर्ष:
साम्प्रदायिकता हमारे समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। इसे खत्म करने के लिए हमें सभी को साथ मिलकर काम करना होगा। हमें अपने धर्मों के प्रति आदर दिखाना चाहिए और समाज में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। Quick Tip: साम्प्रदायिकता को समाप्त करने के लिए शिक्षा और समर्पण की आवश्यकता है। हमें सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए।


Question 71:

‘विज्ञान : वरदान या अभिशाप’ पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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विज्ञान ने मानव जीवन को बदल कर रख दिया है। आजकल विज्ञान के अनेक अविष्कारों ने हमारे जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है। लेकिन यदि इन अविष्कारों का दुरुपयोग किया जाए, तो वे अभिशाप बन सकते हैं।

विज्ञान के लाभ:

1. स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार – विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में अनगिनत सुधार किए हैं। यह अब पहले से कहीं अधिक उन्नत और प्रभावी हो गया है।

2. संचार और सूचना – विज्ञान के कारण अब दुनिया भर में संचार और जानकारी के आदान-प्रदान में तेजी आई है।

3. संसाधन और ऊर्जा – विज्ञान के नए अविष्कारों ने हमें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज में मदद की है।

विज्ञान के खतरे:

1. पर्यावरण का नुकसान – विज्ञान के विकास के साथ पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ा है, जो मानवता के लिए खतरे की घंटी है।

2. नाभिकीय युद्ध – विज्ञान के विकास से नाभिकीय हथियारों का निर्माण हुआ है, जो युद्ध की स्थिति में विनाशकारी हो सकते हैं।

3. साइबर अपराध – विज्ञान के कारण साइबर अपराधों में भी वृद्धि हुई है, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक सुरक्षा खतरे में है।


निष्कर्ष:
विज्ञान ने मानव जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन किए हैं, लेकिन हमें इसका सही उपयोग करना चाहिए। हमें इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए, ताकि यह अभिशाप न बन जाए। Quick Tip: विज्ञान का उपयोग सकारात्मक दिशा में करें, ताकि इससे समाज और पृथ्वी का भला हो सके।


Question 72:

‘छात्र और अनुशासन’ पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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छात्रों का अनुशासन हमारे समाज में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह किसी भी देश के विकास में मुख्य भूमिका निभाता है। अनुशासन का तात्पर्य है समय का सही उपयोग करना, कार्यों को नियमित रूप से करना और नियमों का पालन करना।

अनुशासन का महत्व:

1. समय प्रबंधन – अनुशासन से छात्रों को समय का सदुपयोग करना आता है। यह उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए व्यवस्थित रूप से कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है। समय के महत्व को समझते हुए छात्र न केवल अपनी पढ़ाई, बल्कि अपने दैनिक जीवन के अन्य कार्यों को भी बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।

2. स्वास्थ्य और मानसिक विकास – अनुशासन का पालन करने से छात्रों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह उन्हें नियमित रूप से व्यायाम करने, स्वस्थ आहार लेने और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।

3. कर्तव्य और जिम्मेदारी – अनुशासन से छात्र अपने कर्तव्यों को समझते हैं और अपनी जिम्मेदारियों को निष्ठापूर्वक निभाने का प्रयास करते हैं। यह उन्हें एक अच्छे नागरिक और समाज के लिए योगदान देने वाला व्यक्ति बनाता है।


निष्कर्ष:
समाज में अनुशासन का पालन करना न केवल छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए आवश्यक है। यह हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की ओर मार्गदर्शन करता है। अनुशासन के साथ जीवन जीने से हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं और एक सकारात्मक समाज का निर्माण कर सकते हैं। Quick Tip: \textbf{अनुशासन} सफलता के रास्ते को प्रशस्त करता है। इसका पालन करने से हम न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।


Question 73:

‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान है। यह अभियान देश के हर कोने में सफाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत सड़कों, गलियों, नदियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई की जाती है, ताकि स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण बने।

स्वच्छता का महत्व:

1. स्वास्थ्य के लिए लाभकारी – सफाई रखने से हमें कई प्रकार की बीमारियों से बचाव होता है। गंदगी और प्रदूषण से कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जो सफाई से बची जा सकती हैं।

2. समाज में जागरूकता – स्वच्छता अभियान के माध्यम से समाज में सफाई के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है। यह लोगों को अपने आसपास की सफाई रखने के लिए प्रेरित करता है।

3. पर्यावरण संरक्षण – जब हम अपने वातावरण को साफ रखते हैं, तो हम प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी करते हैं। यह पर्यावरण की रक्षा में मदद करता है।

निष्कर्ष:
स्वच्छ भारत अभियान न केवल भारत के नागरिकों को सफाई की आदत डालने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि यह एक स्वस्थ और स्वच्छ देश बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Quick Tip: स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं है, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना है।


Question 74:

‘किसी यात्रा का वर्णन’ लिखिए।

Correct Answer:
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यात्रा मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यात्रा हमें नए स्थानों की खोज करने, अलग-अलग संस्कृतियों और जीवनशैलियों को जानने का अवसर देती है। हाल ही में मैंने एक यात्रा की, जो मेरे जीवन का एक अद्भुत अनुभव बन गई।


यात्रा का विवरण:

1. यात्रा का उद्देश्य – इस यात्रा का उद्देश्य हिमालय की वादियों में प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना था। हम सभी दोस्तों ने ट्रैकिंग के लिए एक चार दिवसीय यात्रा की योजना बनाई।

2. यात्रा का अनुभव – यात्रा के दौरान हम पहाड़ों, नदियों, और हरे-भरे जंगलों से होते हुए एक छोटे से गांव पहुंचे। वहां के लोग बहुत ही सादगी से रहते थे और उनका जीवन बहुत शांत था। हमने वहां की सांस्कृतिक धरोहर का भी अनुभव किया।

3. स्मरणीय क्षण – यात्रा के अंतिम दिन हम एक पहाड़ी की चोटी पर चढ़े, जहां से पूरा दृश्य बहुत ही सुंदर था। यह पल मेरे लिए जीवनभर याद रहेगा।


निष्कर्ष:
यात्रा केवल एक स्थलीय यात्रा नहीं होती, बल्कि यह हमारी सोच, दृष्टिकोण और जीवनशैली को भी बदलती है। यह हमें न केवल नए स्थानों को जानने का मौका देती है, बल्कि हमारे अंदर धैर्य, संयम और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है। Quick Tip: यात्राएं न केवल स्थलों को देखने का अवसर देती हैं, बल्कि जीवन के अनुभव को भी समृद्ध करती हैं।

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