UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BA) with Answer Key and Solutions PDF is Available to Download

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Shivam Yadav

Updated on - Nov 25, 2025

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 PDF (Code 801 BA) with Answer Key and Solutions PDF is available for download here. UP Board Class 10 exams were conducted between February 24th to March 12th 2025. The total marks for the theory paper were 70. Students reported the paper to be easy to moderate.

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BA) with Solutions

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UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BA) with Solutions

Question 1:

'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के लेखक हैं :

  • (A) 'निराला'
  • (B) जयशंकर प्रसाद
  • (C) रामकृष्ण दास
  • (D) रामचन्द्र शुक्ल
Correct Answer: (B) जयशंकर प्रसाद
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध नाटक और उसके लेखक की पहचान से संबंधित है। 'ध्रुवस्वामिनी' हिंदी के छायावादी युग का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नाटक है।


Step 2: Identifying the Author:

'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। यह उनका अंतिम और सर्वश्रेष्ठ नाटक माना जाता है, जो 1933 में प्रकाशित हुआ।

यह नाटक गुप्त वंश के शासक रामगुप्त और चंद्रगुप्त के समय की कहानी पर आधारित है और इसमें नारी चेतना और स्वतंत्रता के प्रश्न को प्रमुखता से उठाया गया है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) 'निराला' (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'): एक प्रमुख छायावादी कवि थे, लेकिन वे मुख्य रूप से कविता के लिए जाने जाते हैं।

(C) रामकृष्ण दास: एक लेखक और कला समीक्षक थे।

(D) रामचन्द्र शुक्ल: हिंदी साहित्य के सबसे बड़े आलोचक और इतिहासकार माने जाते हैं।


Step 4: Final Answer:

'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: जयशंकर प्रसाद के अन्य प्रसिद्ध नाटकों जैसे 'स्कंदगुप्त', 'चंद्रगुप्त' और 'अजातशत्रु' को भी याद रखें। वे छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं (अन्य तीन - पंत, निराला, महादेवी वर्मा)।


Question 2:

'प्रेमचंद' का विशेष महत्त्व किस रूप में है ?

  • (A) उपन्यासकार
  • (B) निबन्धकार
  • (C) कवि
  • (D) नाटककार
Correct Answer: (A) उपन्यासकार
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न मुंशी प्रेमचंद के हिंदी साहित्य में प्रमुख योगदान की विधा के बारे में है।


Step 2: Analyzing Premchand's Contribution:

मुंशी प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' की उपाधि दी गई है। उन्होंने हिंदी उपन्यास और कहानी को एक नई दिशा दी। उनके उपन्यास यथार्थवादी हैं और भारतीय समाज, विशेषकर ग्रामीण जीवन और किसानों की समस्याओं का सजीव चित्रण करते हैं।

उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में 'गोदान', 'गबन', 'सेवासदन', 'निर्मला' और 'कर्मभूमि' शामिल हैं। उन्होंने लगभग 300 कहानियाँ भी लिखीं, लेकिन उनका विशेष महत्त्व उपन्यासकार के रूप में है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(B) निबन्धकार: उन्होंने कुछ निबंध लिखे हैं, लेकिन यह उनकी मुख्य पहचान नहीं है।

(C) कवि: प्रेमचंद ने कविता नहीं लिखी।

(D) नाटककार: उन्होंने 'कर्बला', 'संग्राम' जैसे कुछ नाटक लिखे, लेकिन वे अपने उपन्यासों के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं।


Step 4: Final Answer:

प्रेमचंद का विशेष महत्त्व एक उपन्यासकार के रूप में है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' के रूप में याद रखें। उनका उपन्यास 'गोदान' हिंदी साहित्य का एक मील का पत्थर माना जाता है।


Question 3:

'रानी केतकी की कहानी' के लेखक हैं :

  • (A) बंग महिला
  • (B) प्रेमचंद
  • (C) इंशा अल्लाह खाँ
  • (D) मोहन राकेश
Correct Answer: (C) इंशा अल्लाह खाँ
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी गद्य के आरंभिक काल की एक महत्वपूर्ण रचना और उसके लेखक से संबंधित है।


Step 2: Identifying the Author:

'रानी केतकी की कहानी' की रचना इंशा अल्लाह खाँ ने 1803 के आसपास की थी। इसे हिंदी की पहली मौलिक गद्य-कथाओं में से एक माना जाता है।

इसकी विशेषता यह है कि लेखक ने इसमें किसी भी विदेशी (अरबी-फारसी) या संस्कृत के शब्दों का प्रयोग न करने का संकल्प लिया था, और ठेठ हिंदवी (खड़ी बोली) का प्रयोग किया था।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष): हिंदी की पहली कहानी लेखिका मानी जाती हैं। उनकी कहानी 'दुलाईवाली' प्रसिद्ध है।

(B) प्रेमचंद: उपन्यास सम्राट हैं, जिनका कार्यक्षेत्र 20वीं सदी का पूर्वार्ध था।

(D) मोहन राकेश: स्वातंत्र्योत्तर युग के एक प्रमुख नाटककार और कहानीकार हैं।


Step 4: Final Answer:

'रानी केतकी की कहानी' के लेखक इंशा अल्लाह खाँ हैं। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: हिंदी गद्य के चार आरंभिक उन्नायकों को याद रखें: मुंशी सदासुखलाल ('सुखसागर'), इंशा अल्लाह खाँ ('रानी केतकी की कहानी'), लल्लू लाल ('प्रेमसागर'), और सदल मिश्र ('नासिकेतोपाख्यान')।


Question 4:

निम्नलिखित में से गद्य की एक विधा नहीं है :

  • (A) महाकाव्य
  • (B) उपन्यास
  • (C) नाटक
  • (D) एकांकी
Correct Answer: (A) महाकाव्य
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं (genres) को पहचानने और उन्हें गद्य (prose) और पद्य (poetry) में वर्गीकृत करने से संबंधित है।


Step 2: Analyzing the Options:

- (B) उपन्यास (Novel): यह गद्य की एक प्रमुख विधा है, जिसमें कथा का विस्तृत वर्णन होता है।

- (C) नाटक (Drama): यह गद्य की एक विधा है, जिसे अभिनय के लिए लिखा जाता है। इसमें संवाद प्रमुख होते हैं।

- (D) एकांकी (One-act Play): यह नाटक का एक छोटा रूप है और गद्य की विधा है।

- (A) महाकाव्य (Epic Poem): यह पद्य (कविता) की एक विधा है। इसमें किसी महान चरित्र या घटना का छंदोबद्ध (metrical verse) रूप में विस्तृत वर्णन होता है। उदाहरण: 'रामचरितमानस', 'कामायनी', 'कुरुक्षेत्र'।


Step 3: Final Answer:

उपन्यास, नाटक और एकांकी गद्य की विधाएँ हैं, जबकि महाकाव्य पद्य की विधा है। अतः, महाकाव्य गद्य की विधा नहीं है। विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: साहित्य की दो मुख्य शाखाएँ हैं - गद्य (Prose) और पद्य (Poetry)। गद्य में कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध आदि आते हैं, जबकि पद्य में कविता, महाकाव्य, खंडकाव्य आदि आते हैं।


Question 5:

'परीक्षा गुरु' उपन्यास के लेखक हैं :

  • (A) यशपाल
  • (B) श्रीलाल शुक्ल
  • (C) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • (D) लाला श्रीनिवास दास
Correct Answer: (D) लाला श्रीनिवास दास
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य के एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण उपन्यास और उसके लेखक की पहचान से संबंधित है।


Step 2: Identifying the Author:

'परीक्षा गुरु' उपन्यास की रचना लाला श्रीनिवास दास ने की थी और यह 1882 में प्रकाशित हुआ था।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल सहित अधिकांश विद्वान् इसे अंग्रेजी ढंग का हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास मानते हैं। यह उपन्यास उपदेशात्मक शैली में लिखा गया है और एक अमीर सेठ के बेटे मदनमोहन की कहानी बताता है जो कुसंगति में पड़कर अपना धन बर्बाद कर देता है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) यशपाल: प्रगतिवादी उपन्यासकार, 'झूठा सच' के लेखक।

(B) श्रीलाल शुक्ल: व्यंग्य उपन्यासकार, 'राग दरबारी' के लेखक।

(C) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: भारत के प्रथम राष्ट्रपति और एक लेखक, लेकिन उपन्यासकार नहीं।


Step 4: Final Answer:

'परीक्षा गुरु' उपन्यास के लेखक लाला श्रीनिवास दास हैं। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: 'परीक्षा गुरु' को हिंदी के पहले मौलिक उपन्यास के रूप में याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


Question 6:

'रामचंद्रिका' के रचनाकार हैं :

  • (A) देव
  • (B) केशव
  • (C) भूषण
  • (D) मतिराम
Correct Answer: (B) केशव
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य के रीतिकाल के एक प्रमुख ग्रंथ और उसके रचनाकार से संबंधित है।


Step 2: Identifying the Author:

'रामचंद्रिका' की रचना केशवदास (या केशव) ने 1601 ईस्वी में की थी। यह एक प्रबंध काव्य है जो भगवान राम की कथा पर आधारित है।

केशवदास रीतिकाल के एक प्रमुख आचार्य कवि थे। 'रामचंद्रिका' अपनी संवाद-योजना के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अपनी क्लिष्ट भाषा और अलंकारों की भरमार के कारण इसे "कठिन काव्य का प्रेत" भी कहा जाता है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) देव, (C) भूषण, और (D) मतिराम, ये सभी रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवि हैं, लेकिन 'रामचंद्रिका' के रचनाकार केशवदास हैं।


Step 4: Final Answer:

'रामचंद्रिका' के रचनाकार केशवदास हैं। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: केशवदास को उनकी क्लिष्टता के कारण 'कठिन काव्य का प्रेत' कहा जाता है, यह तथ्य अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ 'कविप्रिया' और 'रसिकप्रिया' हैं।


Question 7:

'तार सप्तक' में कितने कवियों की रचनाएँ संकलित हैं ?

  • (A) चार
  • (B) सात
  • (C) दस
  • (D) सौ
Correct Answer: (B) सात
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न आधुनिक हिंदी कविता के एक महत्वपूर्ण संकलन 'तार सप्तक' की संरचना के बारे में है।


Step 2: Analyzing 'तार सप्तक':

'सप्तक' शब्द का अर्थ ही 'सात का समूह' होता है।

'तार सप्तक' का संपादन सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने 1943 में किया था। इसमें सात युवा कवियों की रचनाएँ संकलित थीं, जो उस समय नई दिशाओं में प्रयोग कर रहे थे।

ये सात कवि थे - गजानन माधव मुक्तिबोध, नेमिचंद्र जैन, भारतभूषण अग्रवाल, प्रभाकर माचवे, गिरिजाकुमार माथुर, रामविलास शर्मा और स्वयं अज्ञेय।

'तार सप्तक' के प्रकाशन को हिंदी कविता में 'प्रयोगवाद' का आरंभ माना जाता है। इसके बाद तीन और सप्तक (दूसरा सप्तक, तीसरा सप्तक, चौथा सप्तक) प्रकाशित हुए, और प्रत्येक में सात-सात कवि थे।


Step 4: Final Answer:

'तार सप्तक' में सात कवियों की रचनाएँ संकलित हैं। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि कुल चार सप्तक प्रकाशित हुए, सभी का संपादन 'अज्ञेय' ने किया और प्रत्येक में सात कवि थे। 'तार सप्तक' को 'पहला सप्तक' भी कहा जाता है।


Question 8:

'द्विवेदी युग' नाम किसके नाम पर पड़ा ?

  • (A) हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • (B) भारतेंदु हरिश्चन्द्र
  • (C) महावीरप्रसाद द्विवेदी
  • (D) जयशंकर प्रसाद
Correct Answer: (C) महावीरप्रसाद द्विवेदी
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण युग के नामकरण के आधार के बारे में है।


Step 2: Identifying the Person:

आधुनिक हिंदी साहित्य में भारतेंदु युग (1850-1900) के बाद के काल (लगभग 1900-1920) को 'द्विवेदी युग' के नाम से जाना जाता है।

इस युग का नामकरण आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर हुआ है। उन्होंने 1903 से 1920 तक 'सरस्वती' पत्रिका का संपादन किया। इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को परिष्कृत, परिमार्जित और स्थिर करने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने लेखकों को व्याकरण, वर्तनी और भाषा-शैली के बारे में मार्गदर्शन दिया, जिससे हिंदी गद्य का एक मानक रूप विकसित हुआ।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) हजारीप्रसाद द्विवेदी: ये एक बहुत महत्वपूर्ण आलोचक, निबंधकार और उपन्यासकार थे, लेकिन वे द्विवेदी युग के बाद के लेखक हैं।

(B) भारतेंदु हरिश्चन्द्र: इनके नाम पर 'भारतेंदु युग' का नाम पड़ा।

(D) जयशंकर प्रसाद: ये 'द्विवेदी युग' के बाद आने वाले 'छायावाद युग' के प्रवर्तक कवि हैं।


Step 4: Final Answer:

'द्विवेदी युग' का नाम आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर पड़ा है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: यह एक आम भ्रम है कि 'द्विवेदी युग' का नाम हजारीप्रसाद द्विवेदी के नाम पर है। हमेशा याद रखें कि यह महावीरप्रसाद द्विवेदी और उनके 'सरस्वती' पत्रिका के संपादन के योगदान के कारण है।


Question 9:

'कुरुक्षेत्र' के रचनाकार हैं :

  • (A) शमशेरबहादुर सिंह
  • (B) वेदव्यास
  • (C) जयशंकर प्रसाद
  • (D) रामधारी सिंह 'दिनकर'
Correct Answer: (D) रामधारी सिंह 'दिनकर'
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध प्रबंध काव्य और उसके रचयिता से संबंधित है।


Step 2: Identifying the Author:

'कुरुक्षेत्र' एक विचार-प्रधान प्रबंध काव्य है जिसकी रचना 'राष्ट्रकवि' रामधारी सिंह 'दिनकर' ने की थी। यह 1946 में प्रकाशित हुआ।

यह काव्य महाभारत के शांति पर्व की कथा पर आधारित है। इसमें युधिष्ठिर और भीष्म के संवाद के माध्यम से युद्ध की समस्या और उसके परिणामों पर गंभीर दार्शनिक विचार किया गया है। इसे 'आधुनिक युग की गीता' भी कहा जाता है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(A) शमशेरबहादुर सिंह: प्रयोगवादी कवि, जिन्हें 'कवियों का कवि' कहा जाता है।

(B) वेदव्यास: इन्होंने मूल 'महाभारत' की रचना संस्कृत में की थी। 'कुरुक्षेत्र' उसी पर आधारित है, लेकिन इसकी रचना दिनकर ने की है।

(C) जयशंकर प्रसाद: छायावादी कवि, 'कामायनी' महाकाव्य के रचयिता।


Step 4: Final Answer:

'कुरुक्षेत्र' के रचनाकार रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: रामधारी सिंह 'दिनकर' को उनकी ओजस्वी और राष्ट्रवादी कविताओं के कारण 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ 'रश्मिरथी', 'उर्वशी' और 'संस्कृति के चार अध्याय' हैं।


Question 10:

बिहारी ने किस भाषा में काव्य-रचना की ?

  • (A) ब्रज
  • (B) अवधी
  • (C) खड़ी बोली
  • (D) भोजपुरी
Correct Answer: (A) ब्रज
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी साहित्य के रीतिकाल के प्रमुख कवि बिहारीलाल की काव्य-भाषा से संबंधित है।


Step 2: Analyzing Bihari's Work:

बिहारी रीतिकाल की रीतिसिद्ध काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी एकमात्र प्रसिद्ध रचना 'बिहारी सतसई' है, जिसमें लगभग 713 दोहे संकलित हैं।

रीतिकाल में काव्य-रचना की प्रमुख भाषा ब्रजभाषा थी, जिसका प्रयोग शृंगार और भक्ति रस की अभिव्यक्ति के लिए किया जाता था। बिहारी ने भी अपनी 'सतसई' की रचना प्रौढ़ और परिमार्जित ब्रजभाषा में की है।


Step 3: Evaluating Other Options:

(B) अवधी: यह भक्तिकाल में 'रामचरितमानस' (तुलसीदास) और 'पद्मावत' (जायसी) की भाषा थी।

(C) खड़ी बोली: इसका काव्य भाषा के रूप में विकास आधुनिक काल में हुआ।

(D) भोजपुरी: यह एक क्षेत्रीय बोली है, जो उस समय की साहित्यिक मुख्यधारा की भाषा नहीं थी।


Step 4: Final Answer:

बिहारी ने अपनी काव्य-रचना ब्रजभाषा में की है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: रीतिकाल के अधिकांश प्रमुख कवियों जैसे केशवदास, मतिराम, भूषण, देव और बिहारी की काव्य भाषा ब्रजभाषा ही थी।


Question 11:

'हास्य रस' का स्थायी भाव है :

  • (A) क्रोध
  • (B) रति
    (C) भय
  • (D) हास
Correct Answer: (D) हास
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न भारतीय काव्यशास्त्र के 'रस सिद्धांत' से संबंधित है, जिसमें प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव (permanent emotion) निर्धारित किया गया है।


Step 2: Identifying the Sthayi Bhava:

रस सिद्धांत के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की विकृत वेश-भूषा, वाणी या चेष्टाओं को देखकर हृदय में जो आनंद का भाव उत्पन्न होता है, उसे 'हास' नामक स्थायी भाव कहते हैं। यही 'हास' स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो 'हास्य रस' की निष्पत्ति होती है।

अतः, हास्य रस का स्थायी भाव 'हास' है।


Step 3: Analyzing Other Options:

- क्रोध 'रौद्र रस' का स्थायी भाव है।

- रति 'शृंगार रस' का स्थायी भाव है।

- भय 'भयानक रस' का स्थायी भाव है।


Step 4: Final Answer:

'हास्य रस' का स्थायी भाव 'हास' है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: सभी प्रमुख रसों और उनके स्थायी भावों की सूची याद करना परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है (जैसे - करुण का शोक, वीर का उत्साह, अद्भुत का विस्मय आदि)।


Question 12:

'चौपाई' के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती हैं :

  • (A) 11
  • (B) 16
  • (C) 13
  • (D) 24
Correct Answer: (B) 16
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न हिंदी काव्यशास्त्र के 'छंद' प्रकरण से संबंधित है। इसमें चौपाई नामक एक लोकप्रिय छंद की मात्रिक संरचना के बारे में पूछा गया है।


Step 2: Defining Chaupai Chhand:

चौपाई एक 'सम मात्रिक छंद' है। इसका अर्थ है कि इसके सभी चरणों में मात्राओं की संख्या समान होती है।

- इसमें चार चरण (पंक्तियाँ) होते हैं।

- इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।

- चरण के अंत में यति (विराम) होती है।

- चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना वर्जित माना जाता है।

उदाहरण: "मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।।" (दोनों पंक्तियों में 16-16 मात्राएँ हैं)।


Step 4: Final Answer:

चौपाई के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: दोहा और चौपाई सबसे आम छंद हैं। याद रखें: दोहा में 13-11 मात्राएँ होती हैं और चौपाई में प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।


Question 13:

'पीपर पात सरिस मन डोला' पंक्ति में अलंकार है:

  • (A) रूपक
  • (B) उत्प्रेक्षा
  • (C) उपमा
  • (D) अनुप्रास
Correct Answer: (C) उपमा
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न काव्य में प्रयुक्त होने वाले 'अलंकार' (figure of speech) की पहचान से संबंधित है।


Step 2: Analyzing the Line:

पंक्ति है: 'पीपर पात सरिस मन डोला' (अर्थ: पीपल के पत्ते के समान मन डोल गया)।

उपमा अलंकार की पहचान के लिए उसके चार अंगों को देखा जाता है:

1. उपमेय (जिसकी तुलना की जाए): मन

2. उपमान (जिससे तुलना की जाए): पीपर पात (पीपल का पत्ता)

3. वाचक शब्द (तुलना प्रकट करने वाला शब्द): सरिस (समान)

4. साधारण धर्म (दोनों में समान गुण): डोला (डोलना, काँपना)

चूंकि इस पंक्ति में दो वस्तुओं (मन और पीपल के पत्ते) के बीच 'सरिस' वाचक शब्द का प्रयोग करके उनके समान गुण (डोलना) के आधार पर स्पष्ट तुलना की गई है, अतः यहाँ उपमा अलंकार है।


Step 4: Final Answer:

दी गई पंक्ति में उपमा अलंकार है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: उपमा अलंकार को पहचानने का सबसे सरल तरीका वाचक शब्दों को खोजना है, जैसे - सा, सी, से, सम, सरिस, जैसा, ज्यों आदि।


Question 14:

'पंचवटी' में प्रयुक्त समास है :

  • (A) द्विगु
  • (B) कर्मधारय
  • (C) द्वन्द्व
  • (D) तत्पुरुष
Correct Answer: (A) द्विगु
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न 'समास' (compound word) की पहचान से संबंधित है।


Step 2: Analyzing the Word 'पंचवटी':

'पंचवटी' शब्द का विग्रह (dissolution) है: 'पाँच वटों (वृक्षों) का समूह'।

द्विगु समास का नियम है कि यदि किसी सामासिक पद का पहला पद (पूर्वपद) संख्यावाची विशेषण हो और समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराए, तो वहाँ द्विगु समास होता है।

- यहाँ पहला पद 'पंच' (पाँच) संख्यावाची है।

- समस्त पद 'पंचवटी' पाँच वृक्षों के समूह का बोध करा रहा है।

अतः, यहाँ द्विगु समास है।


नोट: यद्यपि 'पंचवटी' एक विशेष स्थान (जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण ठहरे थे) का भी बोध कराता है, जिससे यह बहुव्रीहि समास भी हो सकता है। परन्तु विकल्पों में बहुव्रीहि नहीं है और द्विगु समास का लक्षण स्पष्ट रूप से विद्यमान है, इसलिए यहाँ द्विगु समास ही सही उत्तर है।


Step 4: Final Answer:

'पंचवटी' में द्विगु समास है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: जिस समास का पहला पद संख्या हो और वह एक समूह को दर्शाए, वह द्विगु समास होता है। जैसे: चौराहा (चार राहों का समूह), तिरंगा (तीन रंगों का समाहार), नवरत्न (नौ रत्नों का समूह)।


Question 15:

'गंगा' का पर्यायवाची है :

  • (A) सूर
  • (B) जलयान
  • (C) गगन
  • (D) सुरसरि
Correct Answer: (D) सुरसरि
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न पर्यायवाची (synonym) शब्दों की पहचान से संबंधित है। हमें 'गंगा' शब्द का पर्यायवाची खोजना है।


Step 2: Analyzing the Options:

- (A) सूर: इसका अर्थ देवता, वीर या अंधा व्यक्ति होता है।

- (B) जलयान: इसका अर्थ पानी में चलने वाला वाहन (जहाज, नाव) होता है।

- (C) गगन: इसका अर्थ आकाश या आसमान होता है।

- (D) सुरसरि: यह शब्द 'सुर' (देवता) + 'सरि' (नदी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'देवताओं की नदी'। यह गंगा नदी का एक प्रसिद्ध पर्यायवाची है। गंगा के अन्य पर्यायवाची हैं - भागीरथी, मंदाकिनी, देवनदी, विष्णुपदी, सुरसरिता।


Step 4: Final Answer:

'गंगा' का पर्यायवाची 'सुरसरि' है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख नदियों, देवताओं, और प्राकृतिक तत्वों (जैसे- आग, पानी, हवा, पृथ्वी) के पर्यायवाची शब्द अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, इन्हें अच्छे से याद कर लें।


Question 16:

'अभिमान' में प्रयुक्त उपसर्ग है :

  • (A) अ
  • (B) अभि
  • (C) अप
  • (D) अनु
Correct Answer: (B) अभि
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न 'उपसर्ग' (prefix) की पहचान से संबंधित है। उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी मूल शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं।


Step 2: Analyzing the Word 'अभिमान':

'अभिमान' शब्द को तोड़ने पर हमें मिलता है:

अभि (उपसर्ग) + मान (मूल शब्द)

- यहाँ 'मान' का अर्थ है - इज्जत, प्रतिष्ठा।

- 'अभि' उपसर्ग जुड़ने से 'अभिमान' शब्द बनता है, जिसका अर्थ गर्व या घमंड होता है।


Step 4: Final Answer:

'अभिमान' शब्द में 'अभि' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: किसी शब्द में उपसर्ग पहचानने के लिए, उपसर्ग को हटाने के बाद बचे हुए शब्द का सार्थक होना आवश्यक है। यहाँ 'अभि' हटाने पर 'मान' एक सार्थक शब्द बचता है।


Question 17:

'तद्' शब्द की चतुर्थी विभक्ति, एकवचन, पुल्लिङ्ग का रूप होगा :

  • (A) तेन
  • (B) तौ
  • (C) तस्मै
  • (D) तस्य
Correct Answer: (C) तस्मै
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न संस्कृत व्याकरण के 'शब्द रूप' से संबंधित है। इसमें 'तद्' (वह) सर्वनाम के पुल्लिंग रूप की चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप पूछा गया है।


Step 2: Recalling the Declension of 'तद्' (Masculine):

'तद्' सर्वनाम (पुल्लिंग) का रूप इस प्रकार है:

- प्रथमा: सः, तौ, ते

- द्वितीया: तम्, तौ, तान्

- तृतीया: तेन, ताभ्याम्, तैः

- चतुर्थी: तस्मै, ताभ्याम्, तेभ्यः

- पञ्चमी: तस्मात्, ताभ्याम्, तेभ्यः

- षष्ठी: तस्य, तयोः, तेषाम्

- सप्तमी: तस्मिन्, तयोः, तेषु

तालिका से स्पष्ट है कि चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप 'तस्मै' है।


Step 3: Analyzing the Options:

- (A) तेन: तृतीया, एकवचन

- (B) तौ: प्रथमा/द्वितीया, द्विवचन

- (D) तस्य: षष्ठी, एकवचन


Step 4: Final Answer:

'तद्' शब्द की चतुर्थी विभक्ति, एकवचन, पुल्लिङ्ग का रूप 'तस्मै' होगा। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: 'तद्', 'किम्', 'अस्मद्' और 'युष्मद्' जैसे सर्वनामों के शब्द रूप बहुत महत्वपूर्ण हैं और अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इन्हें कंठस्थ कर लेना चाहिए।


Question 18:

'पद-परिचय' की दृष्टि से 'पद' कितने प्रकार के होते हैं ?

  • (A) दो
  • (B) चार
  • (C) तीन
  • (D) सात
Correct Answer: (A) दो
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Step 1: Understanding the Concept:

'पद' का अर्थ है वाक्य में प्रयुक्त शब्द। 'पद-परिचय' का अर्थ है वाक्य में प्रयुक्त शब्द का व्याकरणिक परिचय देना। प्रश्न यह पूछ रहा है कि व्याकरणिक दृष्टि से पदों को मुख्य रूप से कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है।


Step 2: Analyzing the Classification of 'Pad':

प्रयोग और रूप-परिवर्तन के आधार पर, पदों (शब्दों) के दो मुख्य भेद होते हैं:

1. विकारी पद (Inflected/Mutable Words): वे पद जिनका रूप लिंग, वचन, कारक आदि के कारण बदल जाता है। इसके अंतर्गत चार प्रकार के पद आते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।

2. अविकारी पद (Uninflected/Immutable Words) या अव्यय: वे पद जिनका रूप किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलता। इसके अंतर्गत भी चार प्रकार के पद आते हैं: क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

चूंकि पदों का यह सबसे मौलिक और प्राथमिक वर्गीकरण 'विकारी' और 'अविकारी' के रूप में है, अतः 'पद-परिचय' की दृष्टि से पद के दो मुख्य प्रकार होते हैं।


Step 4: Final Answer:

'पद-परिचय' की दृष्टि से पद के दो मुख्य प्रकार (विकारी और अविकारी) होते हैं। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: यद्यपि पद के कुल 8 (4 विकारी + 4 अविकारी) भेद होते हैं, लेकिन जब 'मुख्य प्रकार' पूछे जाएँ और विकल्पों में 'दो' दिया हो, तो इसका तात्पर्य विकारी और अविकारी के मौलिक विभाजन से होता है।


Question 19:

'कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है :

  • (A) क्रिया की
  • (B) कर्ता की
  • (C) कर्म की
  • (D) भाव की
Correct Answer: (B) कर्ता की
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न 'वाच्य' (Voice) के भेदों से संबंधित है। वाच्य क्रिया का वह रूप है जिससे यह पता चलता है कि वाक्य में क्रिया का मुख्य विषय कर्ता, कर्म या भाव है।


Step 2: Defining Kartrivachya (Active Voice):

'कर्तृवाच्य' के नाम से ही स्पष्ट है - 'कर्तृ' अर्थात् 'कर्ता'।

- जिस वाक्य में कर्ता की प्रधानता होती है और क्रिया का लिंग और वचन कर्ता के अनुसार होता है, उसे कर्तृवाच्य कहते हैं।

- उदाहरण: 'राम पुस्तक पढ़ता है।' यहाँ क्रिया 'पढ़ता है' कर्ता 'राम' (पुल्लिंग, एकवचन) के अनुसार है।


Step 3: Comparing with Other Voices:

- कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है।

- भाववाच्य में भाव (क्रिया) की प्रधानता होती है।


Step 4: Final Answer:

'कर्तृवाच्य' में कर्ता की प्रधानता होती है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: वाच्य के नाम में ही उसकी प्रधानता छिपी होती है: कर्तृ-वाच्य में कर्ता प्रधान, कर्म-वाच्य में कर्म प्रधान, और भाव-वाच्य में भाव प्रधान।


Question 20:

भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है :

  • (A) शब्द
  • (B) वाक्य
  • (C) पद
  • (D) अक्षर
Correct Answer: (D) अक्षर
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न भाषा की संरचना की मूलभूत इकाई के बारे में है। भाषा की इकाइयों का एक पदानुक्रम (hierarchy) होता है।


Step 2: Analyzing the Hierarchy of Language Units:

भाषा की संरचना इस प्रकार है:

- वर्ण या ध्वनि (Phoneme/Grapheme): यह भाषा की सबसे छोटी इकाई है। इसका और विभाजन नहीं किया जा सकता। जैसे- क्, ख्, अ, आ।

- अक्षर (Syllable): एक या एक से अधिक वर्णों का समूह जिसका उच्चारण एक झटके में होता है। जैसे - 'क', 'म', 'ल' (कमल में)।

- शब्द (Word): वर्णों या अक्षरों का सार्थक समूह। यह अर्थ की दृष्टि से भाषा की सबसे छोटी इकाई है।

- पद (Inflected Word): जब कोई शब्द व्याकरणिक नियमों में बँधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है।

- वाक्य (Sentence): पदों का व्यवस्थित और सार्थक समूह जो एक पूर्ण विचार व्यक्त करे।

दिए गए विकल्पों में 'वर्ण' नहीं है। 'वर्ण' और 'अक्षर' को कई बार समानार्थक रूप में प्रयोग किया जाता है, खासकर लिखित रूप के लिए। विकल्पों में सबसे छोटी इकाई 'अक्षर' है।


Step 4: Final Answer:

दिए गए विकल्पों में, भाषा की सबसे छोटी इकाई 'अक्षर' है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: यदि विकल्पों में 'वर्ण' और 'अक्षर' दोनों हों, तो 'वर्ण' को सबसे छोटी इकाई माना जाता है। यदि केवल 'अक्षर' हो, तो वह सही उत्तर होगा। यदि प्रश्न "अर्थ की दृष्टि से सबसे छोटी इकाई" पूछे, तो उत्तर 'शब्द' होगा।


Question 21:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

दूसरी बात जो इस संबंध में विचारणीय है, वह यह है कि संस्कृति अथवा सामूहिक चेतना ही हमारे देश का प्राण है । इसी नैतिक चेतना के सूत्र से हमारे नगर और ग्राम, हमारे प्रदेश और संप्रदाय, हमारे विभिन्न वर्ग और जातियाँ आपस में बँधी हुई हैं । जहाँ उनमें और सब तरह की विभिन्नताएँ हैं, वहाँ उन सबमें यह एकता है । इसी बात को ठीक तरह से पहचान लेने से बापू ने जनसाधारण को बुद्धिजीवियों के नेतृत्व
में क्रांति करने के लिए तत्पर करने के लिए इसी नैतिक चेतना का सहारा लिया था ।

उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer: सन्दर्भ
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Step 1: Identifying the Source:

यह गद्यांश विषय-वस्तु और भाषा-शैली के आधार पर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना से संबंधित प्रतीत होता है। इसमें 'बापू' का उल्लेख स्पष्ट रूप से महात्मा गांधी की ओर संकेत करता है।


Step 2: Stating the Context:

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में संकलित 'भारतीय संस्कृति' नामक निबन्ध से उद्धृत है। इसके लेखक भारत के प्रथम राष्ट्रपति, प्रख्यात विद्वान् डॉ. राजेन्द्र प्रसाद हैं। इस पाठ में लेखक ने भारतीय संस्कृति की एकता और उसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला है।
Quick Tip: सन्दर्भ लिखते समय दो बातें अनिवार्य हैं - पाठ का नाम और लेखक का नाम। यदि संभव हो तो पाठ की मुख्य विषय-वस्तु का एक पंक्ति में उल्लेख करने से सन्दर्भ और भी प्रभावशाली हो जाता है।


Question 22:

हमारे देश का प्राण क्या है ?

Correct Answer: हमारे देश का प्राण संस्कृति अथवा सामूहिक चेतना है।
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Step 1: Analyzing the Question:

प्रश्न सीधे तौर पर पूछ रहा है कि हमारे देश का प्राण (जीवन-शक्ति) क्या है।


Step 2: Locating the Answer in the Passage:

गद्यांश की पहली ही पंक्ति में इसका स्पष्ट उत्तर दिया गया है:

"संस्कृति अथवा सामूहिक चेतना ही हमारे देश का प्राण है ।"

यही चेतना विभिन्नताओं के बावजूद पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोती है।


Step 3: Formulating the Answer:

गद्यांश के अनुसार, हमारे देश का प्राण उसकी संस्कृति अथवा सामूहिक चेतना है। यही वह नैतिक चेतना है जो हमारे नगरों, ग्रामों, प्रदेशों, सम्प्रदायों, वर्गों और जातियों को आपस में बाँधे हुए है।
Quick Tip: गद्यांश पर आधारित प्रश्नों का उत्तर देते समय, सीधे गद्यांश की पंक्तियों को उद्धृत करने के बजाय, उन्हें अपने शब्दों में लिखने का प्रयास करें। इससे आपकी समझ प्रदर्शित होती है।


Question 23:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

इसी बात को ठीक तरह से पहचान लेने से बापू ने जनसाधारण को बुद्धिजीवियों के नेतृत्व

में क्रांति करने के लिए तत्पर करने के लिए इसी नैतिक चेतना का सहारा लिया था ।

Correct Answer: व्याख्या
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व्याख्या:

लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि महात्मा गांधी (बापू) ने भारत की आत्मा को भली-भाँति पहचान लिया था। वे यह समझ गए थे कि भारत की अनेक विविधताओं के भीतर एक सांस्कृतिक और नैतिक एकता का शक्तिशाली सूत्र विद्यमान है, और यही 'सामूहिक चेतना' ही इस देश की असली ताकत है।

इसलिए, जब उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए क्रांति का आह्वान किया, तो उन्होंने केवल बुद्धिजीवियों या शिक्षित वर्ग पर ही भरोसा नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इसी सांस्कृतिक और नैतिक चेतना को जगाया जो आम जनता (जनसाधारण) के हृदय में बसी हुई थी। उन्होंने धर्म, अहिंसा और नैतिकता की भाषा में लोगों से संवाद किया, जिससे साधारण लोग भी बुद्धिजीवियों के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम रूपी क्रांति के लिए एकजुट होकर तैयार हो गए। इस प्रकार, बापू ने भारत की सांस्कृतिक एकता को ही अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनाया।
Quick Tip: रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, केवल उस अंश का शाब्दिक अर्थ न लिखें। बल्कि, उसे पूरे गद्यांश के सन्दर्भ में रखकर उसके गहरे भाव को स्पष्ट करें। कठिन शब्दों को सरल भाषा में समझाएँ।


Question 24:

अथवा

ईर्ष्या का यही अनोखा वरदान है। जिस मनुष्य के हृदय में ईर्ष्या घर बना लेती है, वह उन चीजों से आनन्द नहीं उठाता, जो उसके पास मौजूद हैं। बल्कि, उन वस्तुओं से दुःख उठाता है, जो दूसरों के पास हैं । वह अपनी तुलना दूसरों के साथ करता है और इस तुलना में अपने पक्ष के सभी अभाव उसके हृदय पर दंश मारते रहते हैं।

दंश के इस दाह को भोगना कोई अच्छी बात नहीं है। मगर, ईर्ष्यालु मनुष्य करे भी तो क्या ? आदत से लाचार होकर उसे यह वेदना भोगनी पड़ती है।

उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer: सन्दर्भ
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में संकलित 'ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से' नामक निबन्ध से लिया गया है। इसके लेखक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं। इस निबन्ध में लेखक ने ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावना के स्वभाव, उसके दुष्प्रभावों और उससे बचने के उपायों पर मनोवैज्ञानिक ढंग से विचार किया है।
Quick Tip: सन्दर्भ में लेखक की कोई प्रसिद्ध उपाधि (जैसे यहाँ 'राष्ट्रकवि') का उल्लेख करने से आपका उत्तर अधिक प्रभावी बनता है।


Question 25:

मनुष्य दुःख क्यों भोगता है ?

Correct Answer: उत्तर
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Step 1: Analyzing the Question:

प्रश्न पूछ रहा है कि (ईर्ष्यालु) मनुष्य के दुःख का क्या कारण है।


Step 2: Locating the Answer in the Passage:

गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है:

"...वह उन चीजों से आनन्द नहीं उठाता, जो उसके पास मौजूद हैं। बल्कि, उन वस्तुओं से दुःख उठाता है, जो दूसरों के पास हैं ।"


Step 3: Formulating the Answer:

गद्यांश के अनुसार, ईर्ष्यालु मनुष्य इसलिए दुःख भोगता है क्योंकि वह उन सुखों और साधनों का आनंद नहीं लेता जो स्वयं उसके पास हैं। इसके विपरीत, वह उन वस्तुओं के लिए दुःखी होता है जो दूसरों के पास हैं। वह निरंतर अपनी तुलना दूसरों से करता है और अपनी कमियों को देखकर जलता-कुढ़ता रहता है, यही उसके दुःख का मूल कारण है।
Quick Tip: उत्तर को बिंदुवार या कारण-और-प्रभाव के रूप में प्रस्तुत करने से वह अधिक स्पष्ट और पठनीय हो जाता है।


Question 26:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

वह अपनी तुलना दूसरों के साथ करता है और इस तुलना में

अपने पक्ष के सभी अभाव उसके हृदय पर दंश मारते रहते हैं।

Correct Answer: व्याख्या
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व्याख्या:

लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' ईर्ष्यालु व्यक्ति के मनोविज्ञान का विश्लेषण करते हुए कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह हमेशा अपना मूल्यांकन दूसरों के सापेक्ष में करता है। वह यह नहीं देखता कि उसके पास क्या उपलब्धियाँ हैं, बल्कि यह देखता है कि दूसरों के पास क्या है जो उसके पास नहीं है।

जब वह अपनी तुलना दूसरों से करता है, तो उसे केवल अपनी कमियाँ (अभाव) ही नजर आती हैं। उसे लगता है कि सामने वाला हर मामले में उससे बेहतर है। अपनी ये कमियाँ उसे साँप के डंक (दंश) की तरह चुभती हैं और उसके हृदय को निरंतर पीड़ा देती रहती हैं। यह तुलना की आग उसे अंदर ही अंदर जलाती रहती है और उसके सुख-चैन को छीन लेती है।
Quick Tip: व्याख्या करते समय मूल पाठ में प्रयुक्त मुहावरों या अलंकारिक भाषा (जैसे 'हृदय पर दंश मारना') का अर्थ अपने शब्दों में अवश्य स्पष्ट करें।


Question 27:

दिए गए पद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

निरगुन कौन देस कौ बासी ?

मधुकर कहि समुझाइ सौंह दै,

बूझतिं साँच न हाँसी ।।

को है जनक, कौन है जननी,

कौन नारि, को दासी ?

कैसो बरन, भेष है कैसो,

किहिं रस मैं अभिलाषी ?

पावैगौ पुनि कियौ आपनौ,

जो रे करैगौ गाँसी ।

सुनत मौन है रह्यौ बावरौ,

सूर सबै मति नासी ।।

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer: सन्दर्भ
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के काव्य-खण्ड में संकलित 'पद' शीर्षक से उद्धृत है। यह पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'सूरसागर' के 'भ्रमरगीत' प्रसंग का एक अंश है। इस पद में गोपियाँ उद्धव के निर्गुण ब्रह्म के उपदेश का खंडन करती हुई उनसे सगुण ब्रह्म (श्रीकृष्ण) के विषय में तर्कपूर्ण प्रश्न पूछती हैं।
Quick Tip: काव्य का सन्दर्भ लिखते समय कवि का नाम, कविता का शीर्षक और मूल ग्रंथ (यदि ज्ञात हो) का उल्लेख करना आवश्यक है। प्रसंग का संक्षिप्त वर्णन (जैसे यहाँ 'भ्रमरगीत' प्रसंग) उत्तर को और भी सटीक बना देता है।


Question 28:

पद्यांश में 'मधुकर' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?

Correct Answer: उत्तर
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'भ्रमरगीत' प्रसंग में, गोपियाँ सीधे उद्धव से बात न करके, वहाँ उड़ते हुए एक भौंरे (मधुकर) को माध्यम बनाकर व्यंग्यपूर्वक अपनी बात कहती हैं।

अतः, इस पद्यांश में 'मधुकर' (भौंरा) शब्द प्रतीक रूप में श्रीकृष्ण के दूत उद्धव के लिए प्रयुक्त हुआ है। गोपियाँ भौंरे को संबोधित करते हुए वास्तव में उद्धव से ही प्रश्न पूछ रही हैं।
Quick Tip: 'भ्रमरगीत' की यह एक प्रमुख विशेषता है कि इसमें उद्धव को सीधे संबोधित न करके भौंरे (भ्रमर/मधुकर) के माध्यम से उपालंभ (व्यंग्य) किया गया है।


Question 29:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
मधुकर कहि समुझाइ सौंह दै,
बूझतिं साँच न हाँसी ।।

Correct Answer: व्याख्या
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व्याख्या:

कवि सूरदास जी कहते हैं कि जब उद्धव गोपियों को निराकार (निर्गुण) ब्रह्म की उपासना का उपदेश देते हैं, तो गोपियाँ उन पर व्यंग्य करती हुई कहती हैं - हे मधुकर (उद्धव)! तुम हमें पहले अपनी सौगंध खाकर यह समझाओ और सच-सच बताओ, हम तुमसे कोई हँसी-मजाक नहीं कर रही हैं, बल्कि गंभीरता से पूछ रही हैं।

गोपियों का सौगंध दिलाना उनके प्रश्नों की गंभीरता और उनके तर्क की दृढ़ता को प्रकट करता है। वे उद्धव को यह एहसास दिलाना चाहती हैं कि वे उनकी बातों को हल्के में न लें। वे वास्तव में उस निर्गुण ब्रह्म के बारे में जानना चाहती हैं जिसके बारे में उद्धव उन्हें बता रहे हैं, ताकि वे सिद्ध कर सकें कि उनका सगुण उपास्य श्रीकृष्ण ही श्रेष्ठ है।
Quick Tip: व्याख्या में केवल शाब्दिक अर्थ न बताएँ, बल्कि उसके पीछे छिपे भाव और व्यंग्य को भी उजागर करें। यहाँ 'सौंह दै' (सौगंध दिलाना) गोपियों की वाक्पटुता और तर्क-कुशलता का प्रतीक है।


Question 30:

अथवा

इस समाधि में छिपी हुई है,

एक राख की ढेरी ।

जल कर जिसने स्वतंत्रता की,

दिव्य आरती फेरी ।।
यह समाधि, यह लघु समाधि है,
झाँसी की रानी की ।
अंतिम लीलास्थली यही है,
लक्ष्मी मरदानी की ।

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer: सन्दर्भ
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के काव्य-खण्ड में संकलित 'झाँसी की रानी की समाधि पर' नामक कविता से उद्धृत है। इसकी रचयित्री वीर रस की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। इस कविता में कवयित्री ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को नमन करते हुए उनकी समाधि के प्रति अपनी श्रद्धा-भावना व्यक्त की है।
Quick Tip: किसी कवयित्री या लेखक की प्रमुख विशेषता (जैसे यहाँ सुभद्रा कुमारी चौहान के लिए 'वीर रस की प्रसिद्ध कवयित्री') का उल्लेख करने से सन्दर्भ की गुणवत्ता बढ़ जाती है।


Question 31:

कवयित्री ने किसकी समाधि पर अपनी भावनाएँ व्यक्त की हैं ?

Correct Answer: उत्तर
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पद्यांश की पंक्तियों "यह समाधि, यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की" से स्पष्ट है कि कवयित्री ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर अपनी श्रद्धा और सम्मान की भावनाएँ व्यक्त की हैं। वे उस समाधि को एक साधारण समाधि न मानकर एक वीरांगना के शौर्य और बलिदान का पवित्र प्रतीक मानती हैं।
Quick Tip: उत्तर देते समय प्रश्न के मुख्य शब्दों का प्रयोग करें और पद्यांश से साक्ष्य देकर अपने उत्तर को पुष्ट करें।


Question 32:

रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए ।
यह समाधि, यह लघु समाधि है,
झाँसी की रानी की ।
अंतिम लीलास्थली यही है,
लक्ष्मी मरदानी की ।

Correct Answer: व्याख्या
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व्याख्या:

कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की समाधि की ओर संकेत करते हुए कहती हैं कि यह जो छोटी सी समाधि दिखाई दे रही है, यह किसी साधारण व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस महान वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की है।

यह समाधि केवल मिट्टी का ढेर नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र स्थल है जहाँ पुरुषों के समान वीरता दिखाने वाली 'मरदानी' लक्ष्मीबाई ने अपने जीवन की अंतिम लीला समाप्त की थी। अर्थात्, इसी स्थान पर उन्होंने अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह स्थान उनके शौर्य, पराक्रम और आत्म-बलिदान का साक्षी है। 'लीलास्थली' कहकर कवयित्री ने उनके जीवन-संघर्ष को एक दिव्य कर्म के रूप में प्रस्तुत किया है।
Quick Tip: व्याख्या में विशेष शब्दों जैसे 'लघु समाधि', 'लीलास्थली' और 'मरदानी' के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना आवश्यक है। 'लघु समाधि' उनकी विनम्रता और 'मरदानी' उनके अदम्य साहस को दर्शाता है।


Question 33:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

अस्माकं संस्कृतिः सदा गतिशीला वर्तते । मानवजीवनं संस्कर्तुम् एषा यथासमयं नवां-नवां विचारधारां स्वीकरोति, नवां शक्तिं च प्राप्नोति । अत्र दुराग्रहः नास्ति, यत् युक्तियुक्तं कल्याणकारि च तदत्र सहर्षं गृहीतं भवति । एतस्याः गतिशीलतायाः रहस्यं मानव-जीवनस्य शाश्वतमूल्येषु निहितम्, तद् यथा सत्यस्य प्रतिष्ठा, सर्वभूतेषु समभावः विचारेषु औदार्यम्, आचारे दृढता चेति ।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'भारतीय संस्कृतिः' नामक पाठ से उद्धृत है। इस पाठ में भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।

हिन्दी अनुवाद:

हमारी संस्कृति सदा गतिशील रही है। मानव जीवन को शुद्ध करने के लिए यह समय-समय पर नई-नई विचारधाराओं को स्वीकार करती है और नई शक्ति प्राप्त करती है। इसमें हठधर्मिता नहीं है; जो तर्कसंगत और कल्याणकारी है, वह यहाँ हर्ष के साथ स्वीकार किया जाता है। इसकी गतिशीलता का रहस्य मानव जीवन के शाश्वत मूल्यों में छिपा है, जैसे कि सत्य की प्रतिष्ठा, सभी प्राणियों में समान भाव, विचारों में उदारता और आचरण में दृढ़ता।
Quick Tip: संस्कृत से हिंदी अनुवाद करते समय, विभक्ति और वचन का ध्यान रखते हुए प्रत्येक शब्द का सही अर्थ लगाएँ और फिर वाक्य को हिंदी व्याकरण के अनुसार व्यवस्थित करें। जैसे 'शाश्वतमूल्येषु' (सप्तमी बहुवचन) का अर्थ है 'शाश्वत मूल्यों में'।


Question 34:

अथवा

इयं नगरी विविधधर्माणां संगमस्थली । महात्मा बुद्धः, तीर्थङ्करः पार्श्वनाथः, शङ्कराचार्यः, कबीरः, गोस्वामी तुलसीदासः, अन्ये च बहवः महात्मानः अत्रागत्य स्वीयान् विचारान् प्रासारयन् । न केवलं दर्शने, साहित्ये, धर्मे, अपितु कलाक्षेत्रेऽपि इयं नगरी विविधानां कलानां, शिल्पानाञ्च कृते लोके विश्रुता । अत्रत्याः कौशेयशाटिकाः देशे देशे सर्वत्र स्पृह्यन्ते ।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'वाराणसी' नामक पाठ से उद्धृत है। इसमें वाराणसी नगरी की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का वर्णन किया गया है।

हिन्दी अनुवाद:

यह नगरी अनेक धर्मों का संगम-स्थल है। महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर पार्श्वनाथ, शंकराचार्य, कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और अन्य बहुत से महात्माओं ने यहाँ आकर अपने विचारों का प्रसार किया। केवल दर्शन, साहित्य और धर्म में ही नहीं, अपितु कला के क्षेत्र में भी यह नगरी विविध कलाओं और शिल्पों के लिए संसार में प्रसिद्ध है। यहाँ की रेशमी साड़ियाँ देश-देश में सर्वत्र पसंद की जाती हैं।
Quick Tip: अनुवाद करते समय नामों को यथावत रखें। 'च' (और) का अनुवाद करते समय उसे हिंदी वाक्य में उचित स्थान पर (जैसे अंतिम नाम से पहले) लगाएँ।


Question 35:

दिए गए संस्कृत पद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।

वर्षं तद् भारतं नाम भारती तत्र सन्ततिः ॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'वीरः वीरेण पूज्यते' नामक पाठ से उद्धृत है। यह श्लोक विष्णु पुराण से लिया गया है और इसमें भारतवर्ष की भौगोलिक स्थिति और यहाँ के निवासियों का परिचय दिया गया है।

हिन्दी अनुवाद:

जो (स्थान) समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में स्थित है, वह भारत नाम का देश (वर्ष) है, और वहाँ की संतानें भारती (अर्थात् भारतवासी) हैं।
Quick Tip: श्लोक का अनुवाद करते समय अन्वय (पदों का सही क्रम) करना महत्वपूर्ण होता है। यहाँ 'यत् उत्तरम्' का संबंध 'तद् भारतं नाम वर्षम्' से है।


Question 36:

अथवा

माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा ।

मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'जीवन-सूत्राणि' नामक पाठ से उद्धृत है। यह श्लोक महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से लिया गया है, जिसमें यक्ष के प्रश्नों का युधिष्ठिर उत्तर देते हैं।

हिन्दी अनुवाद:

(यक्ष पूछते हैं - भूमि से भारी क्या है? आकाश से ऊँचा कौन है? वायु से तेज क्या है? और तिनके से अधिक असंख्य क्या है?)
(युधिष्ठिर उत्तर देते हैं -) माता भूमि से अधिक भारी है, पिता आकाश से भी अधिक ऊँचा है। मन वायु से भी अधिक तीव्रगामी है और चिंता तिनकों से भी अधिक असंख्य (या दुर्बल बनाने वाली) है।




% Quick tip
\begin{quicktipbox
यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के श्लोकों का अनुवाद करते समय, प्रश्न और उत्तर के संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए। यहाँ श्लोक सीधे उत्तर प्रस्तुत करता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के श्लोकों का अनुवाद करते समय, प्रश्न और उत्तर के संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए। यहाँ श्लोक सीधे उत्तर प्रस्तुत करता है।


Question 37:

अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर दिए गए प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए :

'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर महात्मा गांधी का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के नायक महात्मा गांधी का चरित्र-चित्रण:

डॉ. राजेन्द्र मिश्र द्वारा रचित 'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के नायक महात्मा गांधी हैं, जो भारतीय इतिहास के महापुरुष हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. अलौकिक महापुरुष: कवि ने गांधीजी को ईश्वर का अवतार बताया है जो भारत को पराधीनता से मुक्त कराने के लिए अवतरित हुए। वे दीन-दुखियों के उद्धारक और मानवता के समर्थक हैं।

2. हरिजनोद्धारक: गांधीजी ने समाज में दलित और उपेक्षित समझे जाने वाले हरिजनों के उद्धार के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने उन्हें समानता और सम्मान का अधिकार दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

3. सत्य और अहिंसा के पुजारी: सत्य और अहिंसा गांधीजी के दो सबसे बड़े शस्त्र थे। उन्होंने इन्हीं सिद्धांतों के बल पर शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य को झुका दिया और भारत को स्वतंत्रता दिलाई।

4. दृढ़-प्रतिज्ञ और साहसी: गांधीजी अपने निश्चय पर अडिग रहते थे। उन्होंने जो भी संकल्प लिया, उसे कठिनाइयों के बावजूद पूरा किया। उनका दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन उनके साहस और दृढ़-प्रतिज्ञा के प्रमाण हैं।

5. सर्वधर्म-समभाव के पक्षधर: गांधीजी सभी धर्मों का समान रूप से आदर करते थे। वे हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे और मानते थे कि सभी धर्मों का मूल एक ही है।

निष्कर्षतः, 'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य में गांधीजी को एक महान देशभक्त, मानवता के पुजारी और युगपुरुष के रूप में चित्रित किया गया है।
Quick Tip: चरित्र-चित्रण लिखते समय, पात्र के गुणों को अलग-अलग शीर्षकों में बाँटकर लिखें। प्रत्येक गुण को खण्डकाव्य की किसी घटना या तथ्य से प्रमाणित करने का प्रयास करें।


Question 38:

'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के नायक जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण:

श्री देवीप्रसाद शुक्ल 'राही' द्वारा रचित 'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के नायक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू हैं। कवि ने उन्हें 'लोकनायक' और 'युगपुरुष' के रूप में चित्रित किया है। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. अलौकिक पुरुष: कवि ने नेहरूजी के व्यक्तित्व में अलौकिक शक्तियों की कल्पना की है। वे उन्हें भारत के भाग्यविधाता के रूप में देखते हैं, जिनमें सूर्य का तेज, चन्द्रमा की शीतलता और हिमालय का धैर्य समाहित है।

2. महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी: नेहरूजी एक महान देशभक्त थे। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और देश को आजाद कराने के लिए अनेक कष्ट सहे और कई बार जेल गए।

3. गांधीजी के सच्चे अनुयायी: वे गांधीजी के विचारों, विशेषकर सत्य, अहिंसा और सर्वधर्म-समभाव, के सच्चे अनुयायी थे। गांधीजी के दिखाए मार्ग पर चलकर ही उन्होंने भारत का नवनिर्माण किया।

4. विश्व-शांति के अग्रदूत: नेहरूजी केवल भारत के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के नेता थे। उन्होंने 'पंचशील' के सिद्धांतों के माध्यम से विश्व में शांति और सह-अस्तित्व की स्थापना का प्रयास किया।

5. प्रकृति-प्रेमी: नेहरूजी को प्रकृति से अगाध प्रेम था। उन्हें भारत की नदियों, पर्वतों और वनों से विशेष लगाव था।

अतः, 'ज्योति जवाहर' के नायक नेहरूजी एक महान, त्यागी, संघर्षशील और मानवतावादी नेता के रूप में हमारे समक्ष आते हैं।
Quick Tip: चरित्र-चित्रण में कवि की कल्पना (जैसे अलौकिक पुरुष) और नायक के वास्तविक ऐतिहासिक गुणों (जैसे देशभक्ति, विश्व-शांति) दोनों का समन्वय प्रस्तुत करना चाहिए।


Question 39:

'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के आधार पर राणा प्रताप का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के आधार पर महाराणा प्रताप का चरित्र-चित्रण:

श्री गंगा रत्न पाण्डेय द्वारा रचित 'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के नायक महाराणा प्रताप हैं। वे त्याग, बलिदान और स्वतंत्रता-प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. अद्वितीय स्वतंत्रता-प्रेमी: महाराणा प्रताप के जीवन का एकमात्र लक्ष्य अपनी मातृभूमि मेवाड़ को मुगलों की अधीनता से मुक्त कराना था। इसके लिए उन्होंने राज-सुख त्यागकर वनों में भटकना स्वीकार किया, परन्तु अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।

2. दृढ़-प्रतिज्ञ और साहसी: वे अपने संकल्प के धनी थे। हल्दीघाटी के युद्ध में पराजित होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अरावली की पहाड़ियों में रहकर अपनी सेना को पुनः संगठित किया। वे अदम्य साहसी और वीर योद्धा थे।

3. त्यागी और कष्ट-सहिष्णु: मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने राजमहलों का वैभव त्याग दिया और अपने परिवार के साथ वनों में रहकर घास की रोटियाँ खाईं। उन्होंने अपने लक्ष्य के लिए हर कष्ट को सहर्ष सहन किया।

4. प्रजावत्सल शासक: वे अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करते थे। उनके दुःखों को देखकर वे अत्यंत भावुक हो जाते थे। भामाशाह द्वारा अपनी सारी संपत्ति अर्पित करने पर वे अभिभूत हो गए थे।

5. आत्मविश्वासी एवं आशावादी: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना आत्मविश्वास और आशा नहीं खोई। अपनी पत्नी और पुत्री के तर्कों से क्षण भर के लिए विचलित होने पर भी वे पुनः अपने कर्तव्य-पथ पर दृढ़ हो जाते हैं।

संक्षेप में, महाराणा प्रताप एक महान देशभक्त, वीर योद्धा और स्वाभिमानी शासक थे, जिनका चरित्र आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
Quick Tip: महाराणा प्रताप के चरित्र का चित्रण करते समय उनके स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रेम को केंद्र में रखें, क्योंकि यही उनके चरित्र का मूल आधार है।


Question 40:

'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर 'श्री कृष्ण' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण:

पं. रामबहोरी शुक्ल द्वारा रचित 'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के नायक श्रीकृष्ण हैं। इस खण्डकाव्य में उन्हें एक आदर्श चरित्र, लोकनायक और युगपुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. दिव्य गुणों से युक्त महापुरुष: यद्यपि श्रीकृष्ण अलौकिक शक्तियों से सम्पन्न हैं, तथापि खण्डकाव्य में उन्हें एक सामान्य मनुष्य के रूप में चित्रित किया गया है जो अपने कर्मों से महान बनता है। वे शील, सौन्दर्य और शक्ति के प्रतीक हैं।

2. श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ: श्रीकृष्ण एक कुशल राजनीतिज्ञ हैं। वे युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ को निर्विघ्न सम्पन्न कराने के लिए अपनी कूटनीति का परिचय देते हैं। वे शिशुपाल की धमकियों से विचलित नहीं होते और सही समय पर सही निर्णय लेते हैं।

3. लोक-कल्याण के पक्षधर: उनका प्रत्येक कार्य लोक-कल्याण की भावना से प्रेरित है। वे समाज में शांति और धर्म की स्थापना करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से वे अत्याचारी शासक शिशुपाल का वध करते हैं।

4. न्यायप्रिय और समदर्शी: वे न्याय के पक्षधर हैं। राजसूय यज्ञ में वे सहदेव के इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं कि अग्रपूजा (प्रथम पूजा) का अधिकार किसी राजा को नहीं, बल्कि सबसे गुणी और श्रेष्ठ व्यक्ति को मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी कुल का हो।

5. निर्भीक और पराक्रमी: श्रीकृष्ण अत्यंत वीर और पराक्रमी हैं। वे शिशुपाल के अपशब्दों को धैर्यपूर्वक सुनते हैं, परन्तु जब वह सीमा लांघ जाता है तो वे निर्भीकतापूर्वक सुदर्शन चक्र से उसका वध कर देते हैं।

अतः, 'अग्रपूजा' में श्रीकृष्ण एक आदर्श मानव, कुशल नेता और धर्म-संस्थापक के रूप में चित्रित किए गए हैं।
Quick Tip: श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण करते समय, खण्डकाव्य के संदर्भ पर ध्यान केंद्रित करें, जो राजसूय यज्ञ और शिशुपाल वध की घटना पर आधारित है। उनके राजनीतिक और लोकनायक रूप को प्रमुखता दें।


Question 41:

'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'जय सुभाष' खण्डकावे के नायक सुभाषचन्द्र बोस का चरित्र-चित्रण:

श्री विनोद चन्द्र पाण्डेय 'विनोद' द्वारा रचित 'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान और तेजस्वी सेनानी थे। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. प्रखर देशभक्त और महान त्यागी: सुभाषचन्द्र बोस के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला धधकती थी। उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए उच्च प्रतिष्ठित 'आई.सी.एस.' की नौकरी को ठुकरा दिया और अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

2. कुशल संगठक और महान सेनानी: वे एक अद्वितीय संगठनकर्ता थे। उन्होंने विदेश जाकर 'आजाद हिन्द फौज' का गठन किया और 'दिल्ली चलो' का नारा देकर सैनिकों में एक नया जोश भर दिया।

3. निर्भीक और साहसी: नेताजी अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति थे। वे अंग्रेजों की कैद से वेष बदलकर निकल भागे और खतरों की परवाह न करते हुए जर्मनी और जापान पहुँचे। उनका जीवन साहस और पराक्रम की गाथा है।

4. ओजस्वी वक्ता: उनके भाषणों में अद्भुत ओज और प्रेरणा होती थी। "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" - उनके इस नारे ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता के महायज्ञ में कूदने के लिए प्रेरित किया।

5. जाति-पाँति से रहित, समदर्शी: वे सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष और समदर्शी थे। उनकी 'आजाद हिन्द फौज' में हिन्दू, मुस्लिम, सिख सभी धर्मों के सैनिक कंधे-से-कंधा मिलाकर लड़ते थे।

संक्षेप में, 'जय सुभाष' के नायक सुभाषचन्द्र बोस एक महान क्रांतिकारी, कुशल सेनानायक और युगप्रवर्तक महापुरुष के रूप में चित्रित किए गए हैं।
Quick Tip: सुभाषचन्द्र बोस का चरित्र-चित्रण लिखते समय उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व, आजाद हिन्द फौज के गठन और उनके प्रेरणादायी नारों का उल्लेख अवश्य करें।


Question 42:

'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र-चित्रण:

डॉ. जयशंकर त्रिपाठी द्वारा रचित 'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक अमर बलिदानी चन्द्रशेखर आजाद हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. महान् देशभक्त: आजाद के जीवन का एकमात्र उद्देश्य भारत माता को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराना था। वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया।

2. वीर और साहसी: चन्द्रशेखर आजाद अदम्य वीरता और साहस की प्रतिमूर्ति थे। वे अंग्रेजों के अत्याचारों से कभी नहीं डरे। काकोरी काण्ड हो या सॉण्डर्स की हत्या, उन्होंने हर कार्य में अपनी वीरता का परिचय दिया।

3. कुशल संगठनकर्ता: वे एक कुशल संगठनकर्ता थे। उन्होंने देश के बिखरे हुए क्रांतिकारियों को एकजुट कर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी' का गठन किया और उसका कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया।

4. स्वाभिमानी और दृढ़-निश्चयी: आजाद ने प्रण किया था कि वे कभी भी अंग्रेजों के हाथ जीवित नहीं आएँगे। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में जब वे अंग्रेजों से घिर गए, तो उन्होंने अपनी अंतिम गोली से स्वयं को बलिदान कर दिया, परन्तु अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।

5. महान् त्यागी: उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने सभी सुखों का त्याग कर दिया और एक कठिन और संघर्षपूर्ण जीवन जिया।

अतः, चन्द्रशेखर आजाद एक महान् देशभक्त, वीर, स्वाभिमानी और त्यागी महापुरुष थे, जिनका बलिदान युगों-युगों तक प्रेरणा देता रहेगा।
Quick Tip: चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र-चित्रण करते समय उनके 'आजाद' नाम की सार्थकता (जीवित न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा) का उल्लेख अवश्य करें। यह उनके चरित्र का केंद्रीय बिंदु है।


Question 43:

'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर 'कुन्ती' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर कुन्ती का चरित्र-चित्रण:

श्री केदारनाथ मिश्र 'प्रभात' द्वारा रचित 'कर्ण' खण्डकाव्य में कुन्ती एक प्रमुख एवं ममस्पर्शी पात्र हैं। वे एक राजमाता होने के साथ-साथ एक विवश माँ भी हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. वात्सल्यमयी माँ: कुन्ती के हृदय में अपने सभी पुत्रों (पांडवों और कर्ण) के लिए असीम वात्सल्य है। वे कर्ण को अपने पुत्र के रूप में स्वीकार न कर पाने की पीड़ा से निरंतर दुःखी रहती हैं। महाभारत युद्ध की आशंका से वे अपने पुत्रों की सुरक्षा के लिए चिन्तित हैं।

2. लोक-लाज से भयभीत: कुन्ती अपने अविवाहित मातृत्व के रहस्य को लेकर सदैव लोक-निन्दा से भयभीत रहती हैं। इसी भय के कारण वे अपने नवजात पुत्र कर्ण को नदी में बहाने जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए विवश होती हैं। यह भय उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी का कारण बनता है।

3. निर्भीक एवं स्पष्टवादिनी: जब उन्हें अपने पुत्रों पर संकट आता दिखाई देता है, तो वे अपने भय पर विजय पाकर निर्भीकता का परिचय देती हैं। वे कर्ण के पास जाकर उसे उसके जन्म का सत्य बताने का साहस करती हैं और स्पष्ट रूप से उससे पांडवों के पक्ष में आने का आग्रह करती हैं।

4. विवश एवं भाग्यहीना: कुन्ती का चरित्र एक विवश और भाग्यहीन माँ का चरित्र है। वे अपने ज्येष्ठ पुत्र कर्ण को न तो पुत्र कह पाती हैं और न ही उसे पांडवों का शत्रु बनने से रोक पाती हैं। उनकी सारी वेदना उनके अन्तर्मन में ही दबी रह जाती है।

इस प्रकार, कुन्ती वात्सल्य, विवशता और अन्तर्द्वन्द्व की प्रतिमूर्ति हैं, जिनका चरित्र पाठकों के हृदय में करुणा का संचार करता है।
Quick Tip: कुन्ती का चरित्र-चित्रण करते समय उनके अन्तर्द्वन्द्व - 'मातृत्व' और 'लोक-लाज' के बीच के संघर्ष को प्रमुखता से दर्शाएँ। यही उनके चरित्र की मूल संवेदना है।


Question 44:

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण:

श्री लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' द्वारा रचित 'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के नायक भरत हैं। वे भ्रातृ-प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के अद्वितीय प्रतीक हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. आदर्श भ्राता: भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति प्रेम और सम्मान अनुकरणीय है। जब उन्हें राम के वनवास और पिता की मृत्यु का समाचार मिलता है, तो वे दुःखी हो जाते हैं। वे राजसिंहासन को ठुकराकर राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट जाते हैं।

2. महान् त्यागी एवं निःस्वार्थ: भरत के चरित्र में त्याग की भावना सर्वोपरि है। वे सहज ही प्राप्त अयोध्या के विशाल साम्राज्य को काँटों के समान त्याग देते हैं। उनके मन में राज्य के प्रति कोई लोभ नहीं है।

3. मातृभक्त: अपनी माता कैकेयी द्वारा राम को वनवास दिए जाने पर वे उन्हें कठोर वचन कहते हैं, परन्तु फिर भी वे माता के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करते हैं और उनका अपमान नहीं करते। वे कौशल्या और सुमित्रा का भी अपनी माँ के समान ही आदर करते हैं।

4. कर्तव्यनिष्ठ शासक: श्रीराम की आज्ञा मानकर वे अयोध्या लौटते हैं, परन्तु सिंहासन पर स्वयं नहीं बैठते। वे सिंहासन पर अपने भाई की चरण-पादुकाएँ रखकर एक सेवक और प्रतिनिधि के रूप में 14 वर्षों तक राज-काज संभालते हैं। यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा का चरम उत्कर्ष है।

5. विनम्र एवं शीलवान: भरत स्वभाव से अत्यंत विनम्र और शीलवान हैं। वे स्वयं को राम के वनवास का कारण मानकर ग्लानि से भरे रहते हैं।

अतः, भरत एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई और कर्मवीर शासक हैं, जिनका चरित्र भारतीय संस्कृति के उच्चादर्शों का प्रतिनिधित्व करता है।
Quick Tip: भरत का चरित्र-चित्रण करते समय 'सिंहासन पर खड़ाऊँ रखकर राज्य चलाना' वाली घटना का उल्लेख अवश्य करें, क्योंकि यह उनके भ्रातृ-प्रेम और त्याग का सबसे बड़ा प्रतीक है।


Question 45:

'तुमुल' खण्डकाव्य के आधार पर लक्ष्मण का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'तुमुल' खण्डकाव्य के आधार पर लक्ष्मण का चरित्र-चित्रण:

श्री श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित 'तुमुल' खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र लक्ष्मण हैं। यद्यपि खण्डकाव्य का नायक मेघनाद है, तथापि लक्ष्मण का चरित्र नायक के समकक्ष ही तेजस्वी और प्रभावशाली है। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. अपूर्व भ्रातृ-भक्त: लक्ष्मण के चरित्र का सर्वप्रमुख गुण उनका अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति है। वे राम की सेवा के लिए अपने सभी राज-सुखों का त्याग कर उनके साथ वन में आए हैं। भाई की सेवा ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।

2. महान् वीर एवं पराक्रमी योद्धा: लक्ष्मण एक अतुलनीय वीर हैं। जब मेघनाद अजेय बनने के लिए यज्ञ करता है, तो लक्ष्मण अकेले ही यज्ञ-शाला में प्रवेश कर उसे चुनौती देते हैं। उनका मेघनाद के साथ हुआ युद्ध अत्यंत भयंकर और रोमांचक है, जो उनकी वीरता को दर्शाता है।

3. निर्भीक एवं तेजस्वी: लक्ष्मण के व्यक्तित्व में तेज और निर्भीकता कूट-कूट कर भरी है। वे शत्रु की शक्ति से भयभीत नहीं होते, बल्कि उसे ललकारते हैं। उनका आत्मविश्वास और शौर्य शत्रु को भी चकित कर देता है।

4. त्यागी एवं निःस्वार्थ सेवक: उन्होंने अपनी पत्नी उर्मिला, माता-पिता और राज-सुख को केवल अपने भाई की सेवा के लिए त्याग दिया। 14 वर्षों तक वे रात-दिन जागकर राम और सीता की सेवा और रक्षा करते हैं।

5. उग्र स्वभाव: लक्ष्मण का स्वभाव थोड़ा उग्र और क्रोधी है। वे अन्याय और अधर्म को देखकर शीघ्र ही आवेश में आ जाते हैं, परन्तु उनका यह क्रोध भी धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए ही होता है।

इस प्रकार, 'तुमुल' खण्डकाव्य में लक्ष्मण एक आदर्श भाई, महान् योद्धा और त्यागी सेवक के रूप में चित्रित किए गए हैं।
Quick Tip: 'तुमुल' खण्डकाव्य लक्ष्मण और मेघनाद के संघर्ष पर केंद्रित है। लक्ष्मण का चरित्र-चित्रण करते समय, उनकी वीरता और पराक्रम को उनके भ्रातृ-प्रेम के संदर्भ में प्रस्तुत करें - कि वे जो कुछ भी कर रहे हैं, वह अपने भाई के लिए कर रहे हैं।


Question 46:

निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :

(i) रामधारी सिंह 'दिनकर' (ii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (iii) जयशंकर प्रसाद

Correct Answer:
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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय


Step 1: Understanding the Concept:

इस प्रश्न में दिए गए लेखकों में से किसी एक का जीवन-परिचय और उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख करना है। हम यहाँ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

जीवन-परिचय:

हिन्दी साहित्य के महान आलोचक, निबंधकार, और साहित्येतिहासकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 ई. में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम पं. चंद्रबली शुक्ल था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता के पास राठ तहसील में प्राप्त की और 1901 में मिशन स्कूल से स्कूल फाइनल की परीक्षा उत्तीर्ण की।

उनकी हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला और उर्दू भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। उन्होंने मिर्जापुर के मिशन स्कूल में चित्रकला के अध्यापक के रूप में कार्य किया और बाद में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में हिन्दी के प्राध्यापक नियुक्त हुए। बाबू श्यामसुंदर दास के अवकाश ग्रहण करने के बाद वे हिन्दी विभाग के अध्यक्ष बने। सन् 1941 ई. में उनका निधन हो गया।


प्रमुख रचना:

आचार्य शुक्ल की प्रमुख रचनाओं में से एक 'चिंतामणि' है, जो उनके निबंधों का संग्रह है। यह दो भागों में प्रकाशित हुआ है। इसमें उनके मनोविकार संबंधी और समीक्षात्मक निबंध संग्रहीत हैं। इसके अतिरिक्त 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' उनकी एक और महत्वपूर्ण कृति है।


Step 3: Final Answer:

अतः, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे, जिनका जन्म 1884 में हुआ और मृत्यु 1941 में हुई। उनकी प्रमुख रचना 'चिंतामणि' है, जो एक प्रसिद्ध निबंध-संग्रह है।
Quick Tip: जीवन-परिचय लिखते समय जन्म, मृत्यु, माता-पिता, शिक्षा, कार्यक्षेत्र और प्रमुख रचनाओं जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें। प्रमुख रचना का नाम स्पष्ट रूप से लिखें और हो सके तो उसकी विधा (जैसे- निबंध, उपन्यास) भी बताएँ।


Question 47:

निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :

(i) तुलसीदास (ii) मैथिलीशरण गुप्त (iii) महादेवी वर्मा

Correct Answer:
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गोस्वामी तुलसीदास का जीवन-परिचय


Step 1: Understanding the Concept:

इस प्रश्न में दिए गए कवियों में से किसी एक का जीवन-परिचय और उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख करना है। हम यहाँ गोस्वामी तुलसीदास का जीवन-परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

जीवन-परिचय:

हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की सगुण काव्यधारा के प्रमुख कवि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 ई. (संवत् 1589 वि.) में उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर नामक गाँव में माना जाता है। कुछ विद्वान उनका जन्म स्थान सोरों (जिला- एटा) मानते हैं। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। कहा जाता है कि वे अभुक्त मूल नक्षत्र में पैदा हुए थे, जिसके कारण उनके माता-पिता ने उन्हें त्याग दिया था।

उनका पालन-पोषण संत नरहरिदास ने किया और उन्हें ज्ञान एवं भक्ति की शिक्षा दी। उनका विवाह रत्नावली नामक युवती से हुआ था। कहते हैं कि अपनी पत्नी की फटकार से ही वे ईश्वर-भक्ति की ओर प्रवृत्त हुए। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन काशी, अयोध्या और चित्रकूट में बिताया। सन् 1623 ई. (संवत् 1680 वि.) में काशी में उनका निधन हो गया।


प्रमुख रचना:

तुलसीदास जी द्वारा रचित 'रामचरितमानस' हिन्दी साहित्य का एक अनुपम महाकाव्य है। यह अवधी भाषा में लिखा गया है और इसमें भगवान श्री राम के जीवन का सम्पूर्ण वर्णन है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विनय-पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली आदि अनेक ग्रंथों की रचना की।


Step 3: Final Answer:

अतः, गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि थे, जिनका जन्म 1532 ई. में हुआ और मृत्यु 1623 ई. में हुई। उनकी सर्वप्रमुख रचना महाकाव्य 'श्रीरामचरितमानस' है।
Quick Tip: किसी कवि या लेखक का जीवन-परिचय लिखते समय उनके साहित्यिक योगदान और भाषा-शैली का भी संक्षिप्त उल्लेख करने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है। जन्म और मृत्यु के सन् के साथ संवत् भी लिखने का प्रयास करें यदि याद हो।


Question 48:

अपनी पाठ्यपुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

इस प्रश्न में अपनी पाठ्यपुस्तक से याद किया हुआ कोई ऐसा संस्कृत श्लोक लिखने को कहा गया है, जो इस प्रश्न-पत्र में पहले से न दिया गया हो।


Step 2: Detailed Explanation:

यहाँ एक प्रसिद्ध श्लोक प्रस्तुत है:
\[ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
\]

अर्थ:

सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का कल्याण हो और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।


Step 3: Final Answer:

उपर्युक्त श्लोक एक मानक उत्तर है जिसे इस प्रश्न के लिए लिखा जा सकता है, बशर्ते यह प्रश्न-पत्र के किसी अन्य भाग में न आया हो।
Quick Tip: परीक्षा से पहले कम से कम दो-तीन सरल और अर्थपूर्ण श्लोक याद कर लें। श्लोक लिखते समय मात्राओं और विसर्ग (ः) तथा हलन्त (्) का विशेष ध्यान रखें ताकि कोई अशुद्धि न हो।


Question 49:

अपने भाई की शादी में आमंत्रित करने हेतु अपने मित्र को पत्र लिखिए।

अथवा

दो दिन का अवकाश लेने हेतु प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए।

Correct Answer:
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दो दिन के अवकाश हेतु प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र


Step 1: Understanding the Concept:

इस प्रश्न में दो विकल्प दिए गए हैं: मित्र को निमंत्रण-पत्र या प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र। हम यहाँ दूसरे विकल्प, यानी प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र का प्रारूप प्रस्तुत कर रहे हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

सेवा में,

श्रीमान प्रधानाचार्य जी,

(विद्यालय का नाम),

(शहर का नाम)।


विषय: दो दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।


महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा १० (अ) का छात्र हूँ। कल रात से मुझे तेज बुखार है, जिसके कारण मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ। डॉक्टर ने मुझे दो दिन तक आराम करने की सलाह दी है।


अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मुझे दिनांक (आज की तारीख) से (आने वाली कल की तारीख) तक दो दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका सदा आभारी रहूँगा।


आपका आज्ञाकारी शिष्य,

(आपका नाम)

कक्षा - १० (अ)

अनुक्रमांक - (आपका रोल नंबर)

दिनांक - (आज की तारीख)


Step 3: Final Answer:

ऊपर दिया गया प्रारूप प्रार्थना-पत्र लिखने के लिए एक सही और मानक संरचना है। इसमें सभी आवश्यक तत्व जैसे विषय, संबोधन, मुख्य भाग और समापन शामिल हैं।
Quick Tip: प्रार्थना-पत्र हमेशा औपचारिक भाषा में लिखा जाता है। पत्र में अवकाश का कारण और अवकाश की तिथियाँ स्पष्ट रूप से लिखें। पत्र का प्रारूप (Format) सही होना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जैसे कि प्रेषक का पता, दिनांक, प्राप्तकर्ता का पद और पता, विषय, और समापन।


Question 50:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए :

(i) चन्द्रशेखरः कः आसीत् ?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रश्न का अर्थ है : चंद्रशेखर कौन थे? इसका उत्तर संस्कृत में देना है।


Step 2: Detailed Explanation:

चंद्रशेखर आजाद भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे। उन्हें संस्कृत में एक प्रसिद्ध देशभक्त और क्रांतिकारी के रूप में वर्णित किया जा सकता है।


Step 3: Final Answer:

उत्तर: चन्द्रशेखरः एकः प्रसिद्धः क्रान्तिकारी देशभक्तः च आसीत्।

(अर्थ: चंद्रशेखर एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी और देशभक्त थे।)
Quick Tip: संस्कृत में उत्तर देते समय प्रश्नवाचक शब्द (जैसे कः, किम्, कुत्र) को हटाकर उसके स्थान पर उत्तरवाचक शब्द रखें और वाक्य को पूरा करें। विभक्ति और वचन का ध्यान रखना आवश्यक है।


Question 51:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए :

(ii) भूमेः गुरुतरं किम् अस्ति ?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रश्न का अर्थ है : भूमि से भारी/महान क्या है? यह प्रश्न यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से है।


Step 2: Detailed Explanation:

महाभारत में यक्ष के प्रश्न का उत्तर देते हुए युधिष्ठिर कहते हैं कि माता का स्थान भूमि से भी बढ़कर है।


Step 3: Final Answer:

उत्तर: माता भूमेः गुरुतरा अस्ति।

(अर्थ: माता भूमि से अधिक भारी/महान है।)
Quick Tip: कुछ प्रसिद्ध सूक्तियाँ और संवाद (जैसे यक्ष-युधिष्ठिर संवाद) परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें याद रखने से ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना आसान हो जाता है।


Question 52:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए :

(iii) पुरुराजः केन सह युद्धम् अकरोत् ?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रश्न का अर्थ है : पुरुराज ने किसके साथ युद्ध किया?


Step 2: Detailed Explanation:

राजा पुरु (पुरुराज) ने यूनानी शासक सिकंदर (अलक्षेन्द्र) के साथ युद्ध किया था। 'केन सह' का अर्थ है 'किसके साथ'। उत्तर में 'अलक्षेंद्रेण सह' (अलक्षेन्द्र के साथ) का प्रयोग होगा।


Step 3: Final Answer:

उत्तर: पुरुराजः अलक्षेंद्रेण सह युद्धम् अकरोत्।

(अर्थ: पुरुराज ने सिकंदर के साथ युद्ध किया।)
Quick Tip: 'सह' (साथ) के योग में हमेशा तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'अलक्षेन्द्र' का तृतीया विभक्ति रूप 'अलक्षेंद्रेण' हुआ है। इस व्याकरणिक नियम को याद रखें।


Question 53:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए :

(iv) वाराणसी केषां संगमस्थली अस्ति ?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रश्न का अर्थ है : वाराणसी किनकी संगमस्थली है?


Step 2: Detailed Explanation:

वाराणसी (काशी) को विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों की संगमस्थली माना जाता है। यह एक प्राचीन और पवित्र नगरी है जहाँ अनेक धर्मों के लोग रहते हैं।


Step 3: Final Answer:

उत्तर: वाराणसी विविधधर्माणां संगमस्थली अस्ति।

(अर्थ: वाराणसी विभिन्न धर्मों की संगमस्थली है।)
Quick Tip: प्रश्न में 'केषाम्' (किनकी) षष्ठी विभक्ति बहुवचन है, इसलिए उत्तर में भी षष्ठी विभक्ति बहुवचन ('विविधधर्माणां') का प्रयोग किया गया है। प्रश्न और उत्तर में विभक्ति की समानता का ध्यान रखें।


Question 54:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए :

(i) साहित्य और समाज

(ii) स्वच्छ भारत अभियान

(iii) लोकतंत्र में मतदान का महत्त्व

(iv) मेरा प्रिय कवि

(v) नारी सशक्तीकरण

Correct Answer:
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स्वच्छ भारत अभियान


Step 1: Understanding the Concept:

दिए गए विषयों में से किसी एक पर निबंध लिखना है। यहाँ 'स्वच्छ भारत अभियान' पर एक आदर्श निबंध प्रस्तुत किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

प्रस्तावना:

'स्वच्छ भारत अभियान' भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रीय स्तर की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती पर 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। महात्मा गाँधी का सपना था कि भारत एक स्वच्छ देश बने, और इसी सपने को साकार करने के लिए यह अभियान चलाया गया।


अभियान का उद्देश्य:

इस अभियान के कई मुख्य उद्देश्य हैं:

1. खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करना।

2. हर घर में शौचालय का निर्माण करवाना।

3. ठोस और तरल कचरे का उचित प्रबंधन करना।

4. लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना।

5. गाँवों और शहरों को स्वच्छ रखना।


अभियान का प्रभाव और महत्व:

स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता के स्तर पर एक सकारात्मक प्रभाव डाला है। इस अभियान के तहत करोड़ों शौचालयों का निर्माण किया गया है, जिससे खुले में शौच की समस्या में कमी आई है। लोगों में अपने आस-पास की सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्कूल, कॉलेज और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। स्वच्छता न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह देश की छवि को भी बेहतर बनाती है और पर्यटन को बढ़ावा देती है।


चुनौतियाँ और समाधान:

इस अभियान के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे लोगों की पुरानी आदतों को बदलना और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को सुदृढ़ करना। इन चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर जन-जागरूकता और सरकारी प्रयासों की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।


उपसंहार:

स्वच्छ भारत अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनांदोलन है। यदि भारत का प्रत्येक नागरिक यह संकल्प ले कि वह न तो गंदगी करेगा और न ही किसी को करने देगा, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश विश्व के सबसे स्वच्छ देशों में गिना जाएगा। एक स्वच्छ भारत ही एक स्वस्थ भारत और श्रेष्ठ भारत बन सकता है।


Step 3: Final Answer:

उपर्युक्त निबंध 'स्वच्छ भारत अभियान' विषय पर एक संरचित और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रस्तावना, उद्देश्य, प्रभाव, चुनौतियाँ और उपसंहार जैसे सभी आवश्यक अंग शामिल हैं।
Quick Tip: निबंध लिखते समय उसे अलग-अलग अनुच्छेदों में बाँटें, जैसे - प्रस्तावना, विषय-विस्तार, और उपसंहार। अपने विचारों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें। महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित भी कर सकते हैं। निबंध की शब्द-सीमा का ध्यान रखें।

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